मेधा कुलकर्णी ने कहा कि भारत 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने के लिए परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
नई दिल्ली: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी संसदीय समिति की अध्यक्ष मेधा विश्राम कुलकर्णी ने कहा कि भारत 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इस संबंध में समिति की बैठक में मौजूदा परमाणु परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
थोरियम और सौर ऊर्जा पर भी रहा जोर
एएनआई से बातचीत में मेधा कुलकर्णी ने बताया कि बैठक में परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ सौर ऊर्जा के विस्तार, भारत के विशाल थोरियम भंडार के उपयोग और यूरेनियम आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा, "आज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समिति की बेहद उपयोगी बैठक हुई। इसमें परमाणु विज्ञान, वर्तमान में संचालित रिएक्टरों की स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।"
2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य
कुलकर्णी ने कहा कि भारत उच्च कार्बन उत्सर्जन वाले ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा के विभिन्न विकल्पों पर एक साथ काम कर रहा है। उन्होंने कहा, "भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का संकल्प लिया है। ईंधन की उपलब्धता, आपूर्ति संबंधी चुनौतियों और कार्बन उत्सर्जन जैसी समस्याओं से निपटने के लिए सौर और परमाणु ऊर्जा क्षमता का लगातार विस्तार किया जा रहा है।"
R&D और निवेश पर सरकार का फोकस
समिति अध्यक्ष ने बताया कि सरकार अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है, ताकि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में देश आत्मनिर्भर बन सके। साथ ही, घरेलू संसाधनों के विकास और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए ईंधन आपूर्ति को भी मजबूत किया जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया से मिलेगा यूरेनियम
मेधा कुलकर्णी ने कहा, "भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। अनुसंधान एवं विकास पर भारी खर्च किया जा रहा है। पहली बार ऑस्ट्रेलिया भारत को पूरा सहयोग देगा और हम वहां से यूरेनियम भी प्राप्त करेंगे।" उन्होंने बताया कि संसदीय समिति की कार्यवाही गोपनीय होती है, इसलिए सभी तकनीकी और रणनीतिक जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि बैठक बेहद सार्थक रही और विभाग की भविष्य की योजनाओं पर व्यापक चर्चा हुई।
(एएनआई)
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