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पानी भरे गड्ढे में डूबकर 8 वर्षीय बच्ची की मौत

बांदा में दर्दनाक हादसा: खेत के गहरे पानी भरे गड्ढे में डूबकर 8 वर्षीय बच्ची की मौत

बांदा के बिसंडा क्षेत्र में कोचिंग से लौटने के बाद खेत में पानी भरे गड्ढे में नहाने गई 8 वर्षीय बच्ची की डूबने से मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा है।

बांदा में दर्दनाक हादसा खेत के गहरे पानी भरे गड्ढे में डूबकर 8 वर्षीय बच्ची की मौत

8-Year-Old Girl Dies After Drowning in Deep Pit in Banda |

बांदा (राजस्थान)। कोचिंग से लौटने के बाद घर पहुंचने से पहले ही एक मासूम की जिंदगी हमेशा के लिए थम गई। दोस्तों के साथ खेलते-खेलते खेत में बने पानी से भरे गहरे गड्ढे में नहाने उतरी 8 वर्षीय बच्ची कुछ ही पलों में गहरे पानी में समा गई।साथ खेल रहे बच्चे उसे बचाने की कोशिश करते रहे,लेकिन वह उनकी आंखों के सामने लापता हो गई। करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू के बाद जब बच्ची को बाहर निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया,तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। इस दर्दनाक हादसे से पूरे गांव में मातम पसरा है।

कोचिंग से लौटने के बाद खेतों की ओर चली गई थी बच्ची

घटना बिसंडा थाना क्षेत्र के मरौली गांव की है। गांव निवासी अवधेश की 8 वर्षीय पुत्री शिक्षा,जो प्राथमिक विद्यालय में कक्षा चार की छात्रा थी,कोचिंग पढ़कर लौटी थी। घरवालों को बिना बताए वह खेतों की ओर चली गई। वहां उसके कुछ दोस्त पानी से भरे गहरे गड्ढे में नहा रहे थे। खेल-खेल में शिक्षा भी पानी में उतर गई, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह मासूम खेल उसकी जिंदगी का आखिरी पल बन जाएगा। अचानक वह गहरे पानी में चली गई और देखते ही देखते बच्चों की आंखों से ओझल हो गई।

दो घंटे की मशक्कत के बाद निकाला गया शव

घबराए बच्चों के शोर मचाने पर ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे। गड्ढे में उतरकर घंटों तलाश की गई। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शिक्षा को बाहर निकाला गया। उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

बेटी के शव से लिपटकर रोती रही मां

शिक्षा अपने परिवार में तीन बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी थी। उसकी मौत की खबर मिलते ही घर में चीख-पुकार मच गई। मां रन्नू देवी बेटी के शव से लिपटकर बार-बार बेसुध हो रही थीं। बिलखते हुए उन्होंने कहा, "गरीबी की वजह से उसके पिता महाराष्ट्र के पुणे में मजदूरी करते हैं। अगर वह घर पर होते तो शायद मेरी बेटी बच जाती।" यह कहते-कहते वह बेहोश हो गईं। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

खुले गड्ढों को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर खेतों में बने खुले और पानी से भरे गहरे गड्ढों की अनदेखी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे जानलेवा गड्ढों को सुरक्षित नहीं किया गया तो भविष्य में भी मासूमों की जान जोखिम में पड़ती रहेगी।

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