इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोर्ट परिसर में नारेबाजी और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने वाले वकीलों पर कड़ा रुख अपनाया है।
Allahabad HC Directs Identification of Lawyers Disrupting Proceedings via CCTV |
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक गंभीर घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए बड़ा आदेश दिया है। यह मामला कोर्ट परिसर के अंदर वकीलों द्वारा की गई नारेबाजी, अदालती कार्यवाही में बाधा डालने और न्यायिक प्रक्रिया में रुकावट पैदा करने से जुड़ा हुआ है। इस तरह के आचरण को सीधे तौर पर 'अदालत की अवमानना' करार दिया गया है। अदालत ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे कोर्ट रूम के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की तुरंत जांच करें और हंगामा करने वाले वकीलों की पहचान सुनिश्चित करें।
पहचान के बाद बार काउंसिल और अवमानना की कार्रवाई
अदालत के निर्देश के अनुसार, रजिस्ट्रार को इस पूरी जांच प्रक्रिया के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जैसे ही दोषी वकीलों की पहचान पूरी हो जाएगी, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजा जाएगा। इसके साथ ही, इन वकीलों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है, ताकि न्यायिक कार्य में इस तरह की बाधा को रोका जा सके।
मंगलवार के विवाद और कोर्ट नंबर 49 के बहिष्कार की मांग
यह पूरी घटना मंगलवार को कोर्ट नंबर 49 में हुए एक विवाद के बाद सामने आई है। उस दौरान कोर्ट ने एक वकील को चेतावनी दी थी कि उन्हें जेल भेजा जा सकता है और उनसे एसपी से माफी मांगने के लिए भी कहा गया था। इस घटनाक्रम के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर कोर्ट नंबर 49 के बहिष्कार की मांग की थी, जिसके चलते बुधवार को इसी मामले को लेकर वकीलों ने कोर्ट परिसर के अंदर जमकर हंगामा किया और नारेबाजी की।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ का आदेश
यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ द्वारा याचिकाकर्ता देवेंद्र कुमार की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने न्यायिक कामकाज की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम उठाया है। इस मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके और अदालत का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जा सके। (Source: ANI)
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