इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी के अवैध टावरों और अतिरिक्त मंजिलों को गिराने का आदेश देते हुए बिल्डर पर ₹25 लाख का जुर्माना लगाया है।
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद में गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी में अवैध कंस्ट्रक्शन के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDA) को सोसाइटी के अवैध टावर 27 और 28 को पूरी तरह से गिराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने टावर 16, 17, 18 और 19 की अवैध रूप से बनी नौवीं और दसवीं मंजिल को भी दो महीने के अंदर गिराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बिल्डर पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह रकम एक महीने के अंदर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (GGRWA) के अकाउंट में जमा करनी होगी। गिराने का पूरा खर्च प्रमोटर से लैंड रेवेन्यू के बकाए के तौर पर वसूला जाएगा। पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन को GDA को सुरक्षा देने का निर्देश दिया गया है।
GDA को उसके अधिकारियों की लापरवाही के लिए लगाई फटकार
कोर्ट ने GDA को उसके अधिकारियों की लापरवाही के लिए फटकार लगाई और कहा कि उनकी लापरवाही के कारण निवासियों को नुकसान हुआ है। GDA को हर पिटीशनर को 50,000 रुपये खर्च देने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि प्रमोटर के खिलाफ धोखाधड़ी और UP अपार्टमेंट एक्ट के उल्लंघन के आरोपों पर दो हफ़्ते के अंदर FIR दर्ज की जाए। पूरे मामले की जांच एडिशनल पुलिस कमिश्नर (एडिशनल CP) रैंक का अधिकारी करेगा। कोर्ट ने तीसरी कंपाउंडिंग को पूरी तरह से गैर-कानूनी बताया। कोर्ट ने फायर NOC और कंप्लीशन सर्टिफिकेट न होने पर भी कड़ी नाराज़गी जताई।
जांच अधिकारी सुरेंद्र सिंह को तुरंत सस्पेंड करने के आदेश
कोर्ट ने जांच अधिकारी सुरेंद्र सिंह को तुरंत सस्पेंड करने का आदेश दिया, जिन्होंने बिना जांच किए 2018 की FIR में बिल्डर को क्लीन चिट दे दी थी। उनके खिलाफ डिपार्टमेंटल कार्रवाई के भी आदेश दिए गए हैं। बिल्डर 85 खरीदारों को 10% ब्याज के साथ पैसे वापस करेगा। कोर्ट ने कॉमन एरिया की गैर-कानूनी बिक्री पर भी सख्त रुख अपनाया। यह आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की डिवीजन बेंच ने दिया।
(इनपुटः ANI)
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