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लगातार तूल पकड़ रहा राम मंदिर चोरी मामला

'राम मंदिर और ट्रस्ट की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे लोग'

राम मंदिर चोरी मामला लगातार तूल पकड़ता नजर आ रहा है. इस मामले में अब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने अपने विचार रखें.

राम मंदिर और ट्रस्ट की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे लोग

Vikas Tyagi |

सहारनपुर: बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने राम मंदिर को लेकर लगाए जा रहे कथित जमीनी घोटाले के आरोपों पर विपक्षी दलों की आलोचना की। कलेक्ट्रेट पहुंचे विकास त्यागी ने कहा कि विपक्ष बिना ठोस साक्ष्यों के राम मंदिर को राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहा है।

झूठे आरोप लगाने वालों पर भी होनी चाहिए कानूनी कार्रवाई 

उन्होंने कहा कि जो लोग राम मंदिर निर्माण में कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं, उन्हें विशेष जांच दल (एसआईटी) के समक्ष अपने दावों के प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए. उनका कहना था कि अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अगर आरोप निराधार साबित होते हैं तो झूठे आरोप लगाने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। 

राम मंदिर और मंदिर ट्रस्ट की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे लोग

विकास त्यागी ने कहा कि वह विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार द्वारा एसआईटी से आरोप लगाने वालों से साक्ष्य मांगने की पहल का समर्थन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राम मंदिर और मंदिर ट्रस्ट की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने टीनू यादव का उल्लेख करते हुए कहा कि मीडिया में सामने आई खबरों के अनुसार उसके कुछ राजनीतिक नेताओं से संबंध बताए जा रहे हैं. उन्होंने आशंका जताई कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आवश्यकता पड़ने पर सीबीआई जांच भी कराई जानी चाहिए. 

वक्फ बोर्ड में 50 प्रतिशत हिंदू सदस्यों को किया जाना चाहिए शामिल

विकास त्यागी ने यह भी कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट को उन लोगों के दावों की भी जांच करनी चाहिए, जो सोना-चांदी या बड़ी धनराशि दान करने का दावा कर रहे हैं. उनके अनुसार, राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं के छोटे-छोटे योगदान से बना है. इसके अलावा उन्होंने वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि सभी राज्यों के वक्फ बोर्ड में 50 प्रतिशत हिंदू सदस्यों को भी शामिल किया जाना चाहिए. उनका दावा था कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और संपत्तियों से जुड़े विवादों की निष्पक्ष निगरानी सुनिश्चित हो सकेगी.

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