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हिमांगी सखी पर शंकराचार्य विवाद

हिमांगी सखी को किन्नर शंकराचार्य घोषित करने पर विवाद गहराया

भोपाल। राजधानी में हाल ही में हुए 'किन्नर धर्म सम्मेलन' के बाद हिमांगी सखी को 'किन्नर शंकराचार्य' घोषित करने पर विवाद गहरा गया है।

हिमांगी सखी को किन्नर शंकराचार्य घोषित करने पर विवाद गहराया

Himangi Sakhi Controversy |

भोपाल। राजधानी में हाल ही में हुए 'किन्नर धर्म सम्मेलन' के बाद हिमांगी सखी को 'किन्नर शंकराचार्य' घोषित करने पर विवाद गहरा गया है। अखिल भारतीय संत समिति और अन्य हिंदू संगठनों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है।

सनातन धर्म के खिलाफ 

संत समाज का कहना है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने देश में केवल चार पीठों की स्थापना की थी। किसी नई पीठ का निर्माण करना या खुद को 'शंकराचार्य' घोषित करना सनातन परंपरा के विरुद्ध है।

​प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

संतों के अनुसार, शंकराचार्य का पद एक विशिष्ट धार्मिक और शास्त्रीय प्रक्रिया के बाद दिया जाता है। इसे किसी सम्मेलन में घोषित नहीं किया जा सकता।

​यह पद का अपमान 

कई संतों ने सुझाव दिया कि यदि सम्मान देना ही था, तो उन्हें 'किन्नराचार्य' कहा जा सकता था, लेकिन 'शंकराचार्य' शब्द का प्रयोग पद का अपमान है।

​घोषणा का 11 दिन में करें खंडन

अखिल भारतीय संत समिति ने आयोजकों को 11 दिन का समय दिया है कि वे इस घोषणा का सार्वजनिक रूप से खंडन करें।

​कानून के तहत होगी कार्रवाई

यदि 11 दिनों के भीतर इस पदवी और पीठ की घोषणा को वापस नहीं लिया गया, तो समिति ने धारा 420 (धोखाधड़ी) और अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज कराने की चेतावनी दी है।

​पुलिस कमिश्नर को शिकायती पत्र दिया -  स्वामी अनिलानंद ने इस संबंध में 15 फरवरी को ही भोपाल पुलिस कमिश्नर को शिकायत पत्र सौंप दिया था।15 फरवरी 2026 भोपाल में महाशिवरात्रि पर हिमांगी सखी का 'किन्नर शंकराचार्य' के रूप में पट्टाभिषेक। पुष्कर में नई पीठ की घोषणा।

इस सम्मेलन के दौरान आयोजकों ने लगभग 60 से 200 किन्नरों की 'घर वापसी' (पुनः सनातन धर्म स्वीकार करने) का दावा भी किया था, जिसे धार्मिक दृष्टिकोण से एक बड़ा कदम बताया गया था।

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