उज्जैन। शहर के त्रिवेणी के प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर में शनिवार को लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। इस खास मौके...
उज्जैन। शहर के त्रिवेणी के प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर में शनिवार को लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। इस खास मौके पर भक्तों ने भगवान शनिदेव के दर्शन किए और जमकर तेल अर्पित किया। महज 24 घंटे के भीतर मंदिर में 1000 लीटर से भी अधिक तेल इकट्ठा हो गया।
किसानों को बेचा जाएगा चढ़ाया गया तेल
श्रद्धालुओं द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में चढ़ाए गए तेल को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। मंदिर प्रशासन ने फैसला किया है कि इस एकत्रित तेल को फिल्टर करने के बाद उचित दामों पर स्थानीय किसानों को बेचा जाएगा। इससे होने वाली आय का उपयोग मंदिर के विकास और व्यवस्थाओं में किया जाएगा।
घाट पर छोड़े गए कपड़ों और जूते-चप्पलों से बनेगा ईंधन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिश्चरी अमावस्या पर शिप्रा नदी में स्नान करने के बाद अपने पहने हुए पुराने कपड़े और जूते-चप्पल वहीं घाट पर छोड़ देने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और 'पनौती' (कष्टों) से मुक्ति मिलती है। इस परंपरा के चलते त्रिवेणी घाट पर बड़ी मात्रा में कपड़े और जूते-चप्पलों के ढेर लग गए। प्रशासन और स्वच्छता टीम ने घाटों की सफाई कर इस कचरे को हटाने का काम शुरू किया है। इस बार इन छोड़े गए कपड़ों और जूतों को रीसायकल कर ईंधन तैयार करने के लिए प्लांट में भेजा जाएगा, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान न पहुंचे।
13 साल बाद बना था विशेष संयोग
पंडितों और जानकारों के अनुसार, इस बार करीब 13 साल बाद शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का ऐसा दुर्लभ संयोग बना था, जिसके कारण देशभर से लाखों भक्त अपनी कुंडली के दोषों के निवारण और सुख-समृद्धि की कामना लेकर उज्जैन पहुंचे थे। भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा घाटों पर सुरक्षा और स्नान के लिए विशेष फव्वारों (शॉवर) का इंतजाम किया गया था।
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