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मैगी मामले में नेस्ले को हाई कोर्ट से राहत

मैगी विवाद में नेस्ले को बड़ी राहत, दिल्ली हाई कोर्ट ने 2015 के आपराधिक मामले किए रद्द

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2015 मैगी विवाद में नेस्ले इंडिया को राहत देते हुए दो आपराधिक मामले, समन आदेश और संबंधित कार्यवाही रद्द कर दी।

मैगी विवाद में नेस्ले को बड़ी राहत दिल्ली हाई कोर्ट ने 2015 के आपराधिक मामले किए रद्द

Delhi HC Quashes 2015 Maggi Criminal Case |

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने 2015 के चर्चित मैगी नूडल्स विवाद में नेस्ले इंडिया और उसके अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए उनसे जुड़े दो आपराधिक मामलों, निचली अदालत के समन आदेशों और सभी संबंधित कार्यवाहियों को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि बदली परिस्थितियों और बाद के वैज्ञानिक निष्कर्षों को देखते हुए अभियोजन जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

हाई कोर्ट ने रद्द किए समन और आपराधिक मामले

न्यायमूर्ति मधु जैन ने धर्मेंद्र हंसराज कोटक समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका स्वीकार करते हुए 6 नवंबर 2015 और 11 जनवरी 2016 को जारी समन आदेशों के साथ सभी लंबित आपराधिक कार्यवाहियों को निरस्त कर दिया।

बाद के वैज्ञानिक परीक्षण बने फैसले का आधार

अदालत ने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा मैगी पर लगे प्रतिबंध को रद्द किए जाने, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मैसूरु स्थित CSIR-CFTRI द्वारा कराए गए नए परीक्षण और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) की बाद की कार्यवाही ने मूल आरोपों की नींव को काफी कमजोर कर दिया है।

2015 में सीसे की अधिक मात्रा का लगा था आरोप

मई 2015 में दिल्ली के खाद्य सुरक्षा विभाग ने मैगी के नमूने लिए थे। खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट में मसाला टेस्टमेकर में सीसे (Lead) की मात्रा तय सीमा 2.5 पीपीएम से अधिक बताई गई थी। साथ ही "नो एडेड एमएसजी" के दावे को लेकर गलत ब्रांडिंग के आरोप भी लगाए गए थे, जिसके आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आपराधिक शिकायतें दर्ज हुई थीं।

नेस्ले ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि पूरा मामला उन खाद्य विश्लेषक रिपोर्टों पर आधारित था, जिनकी वैधता बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के बाद कमजोर हो गई। उन्होंने बताया कि बाद में मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं और CSIR-CFTRI द्वारा किए गए परीक्षणों में सीसे की मात्रा तय मानकों के भीतर पाई गई।

राज्य सरकार ने किया था विरोध

दिल्ली सरकार की ओर से दायर जवाब में कहा गया कि शिकायतें कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए दर्ज की गई थीं और बाद के फैसलों से दिल्ली में दर्ज मामलों पर स्वतः असर नहीं पड़ता। हालांकि हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

अदालत बोली- मुकदमा जारी रखना कानून का दुरुपयोग

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुए नए वैज्ञानिक परीक्षण मूल रिपोर्टों को कमजोर कर चुके हैं, तो ऐसे में अभियोजन जारी रखना उचित नहीं है। अदालत ने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड हाई कोर्ट के समान फैसलों का भी हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में मुकदमा आगे बढ़ाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

 (एएनआई)

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