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शिक्षा विभाग में रिश्वत के आरोप से मचा हड़कंप

शिक्षा विभाग में रिश्वत के आरोप से मचा हड़कंप, शिक्षक और संकुल प्राचार्य आमने-सामने

मध्य प्रदेश के डिंडौरी में एक शिक्षक ने संकुल प्राचार्य पर जांच प्रभावित करने के नाम पर 5 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया है। प्राचार्य ने आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है।

शिक्षा विभाग में रिश्वत के आरोप से मचा हड़कंप शिक्षक और संकुल प्राचार्य आमने-सामने

Bihar News |

डिंडौरी: मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में बजाग विकासखंड की सिलपीड़ी प्राथमिक शाला से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है। प्राथमिक शिक्षक तेजलाल धुर्वे ने चांडा संकुल प्राचार्य तीरथ सिंह परस्ते पर जांच को प्रभावित करने के नाम पर 5 हजार रुपये लेने का गंभीर आरोप लगाया है। 

दोनों पक्षों के बीच खुलकर शुरू हो गए आरोप-प्रत्यारोप

आरोप सामने आने के बाद दोनों पक्षों के बीच खुलकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। हालांकि, फिलहाल किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले की सच्चाई विभागीय जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। जानकारी के अनुसार, मीडिया से चर्चा के दौरान प्राथमिक शिक्षक तेजलाल धुर्वे ने दावा किया कि संकुल प्राचार्य तीरथ सिंह परस्ते ने सहायक आयुक्त कार्यालय में पदस्थ एक बाबू के नाम पर उनसे 5 हजार रुपये की राशि ली थी। 

आरोपों को सिरे से किया खारिज

उनका आरोप है कि यह राशि उनके खिलाफ चल रही जांच को प्रभावित कराने के उद्देश्य से मांगी गई थी। शिक्षक ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। दूसरी ओर जब इस संबंध में चांडा संकुल प्राचार्य तीरथ सिंह परस्ते से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि शिक्षक तेजलाल धुर्वे द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन हैं। 

मीडिया से बातचीत के दौरान नशे में दिखाई दिए तेजलाल धुर्वे

उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया से बातचीत के दौरान तेजलाल धुर्वे शराब के नशे में दिखाई दे रहे थे। वे बिना किसी प्रमाण के उन पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर शिक्षक के आरोप सही साबित होते हैं तो यह सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार का गंभीर मामला माना जाएगा। वहीं अगर आरोप झूठे पाए जाते हैं तो किसी अधिकारी की छवि धूमिल करने के प्रयास के रूप में भी इसे देखा जाएगा।

शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकीं निगाहें

फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। एक ओर शिक्षक रिश्वत लेने का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर संकुल प्राचार्य इन आरोपों को पूरी तरह असत्य बताते हुए शिक्षक की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में बिना जांच किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। अब निगाहें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। अगर विभाग इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराता है तो न केवल सच्चाई सामने आएगी। 

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