Mahakal Temple : महाकाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर महापौर द्वारा सवाल उठाने और औपचारिक पत्र जारी करने के बाद, मंदिर समिति और महापौर के बीच विवाद गहरा गया है।
Mahakal Temple : महाकाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर महापौर द्वारा सवाल उठाने और औपचारिक पत्र जारी करने के बाद मंदिर समिति और महापौर के बीच विवाद गहरा गया है। बताया जा रहा है कि महापौर और मंदिर प्रशासन के बीच समन्वय टूटता जा रहा है। दो दिन पहले महापौर मुकेश टटवाल ने अवंतिका गेट पर श्रद्धालुओं को हो रही परेशानियों के तत्काल समाधान की मांग करते हुए मंदिर समिति को पत्र लिखा था। इसके तुरंत बाद मंदिर समिति ने महापौर के आधिकारिक कोटे से जारी सभी 25 भस्म आरती अनुमतियाँ रद्द कर दीं, जिससे मामला और गरमा गया।
भस्म आरती अनुमति रद्द होने का आरोप
महापौर का आरोप है कि शनिवार रात पत्र जारी होने के बाद कई श्रद्धालुओं ने उनसे संपर्क किया। इन श्रद्धालुओं को भस्म आरती की अनुमति के कन्फर्मेशन मैसेज तो मिले, लेकिन भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। जांच करने पर पता चला कि उनके कोटे की सभी 25 भस्म आरती अनुमतियाँ रद्द कर दी गई हैं। महापौर ने कहा कि उन्होंने मंदिर प्रशासक को कई बार फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई।
बाद में कलेक्टर रोशन सिंह से बातचीत के बाद मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक की ओर से संदेश आया कि अनुमतियों की प्रक्रिया जारी है।इस कथित प्रशासनिक लापरवाही से नाराज होकर महापौर ने रविवार को एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसका समापन उन्होंने “जय श्री महाकाल” के उद्घोष के साथ किया।
अवंतिका गेट पर अव्यवस्था को लेकर पत्र
10 जनवरी को लिखे अपने पत्र में महापौर ने कहा कि उज्जैन के स्थानीय श्रद्धालुओं को अवंतिका गेट पर भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। आधार-आधारित प्रवेश व्यवस्था इसलिए लागू की गई थी, ताकि शहरवासियों को लंबी कतारों से बचाते हुए त्वरित दर्शन मिल सके।
हालांकि वर्तमान में अवंतिका गेट से प्रवेश के बाद भी स्थानीय श्रद्धालुओं को सामान्य कतार में भेजा जा रहा है, जिससे इस सुविधा का उद्देश्य ही समाप्त हो रहा है। महापौर ने मंदिर समिति से त्वरित दर्शन व्यवस्था तत्काल बहाल करने की मांग की।
भस्म आरती कोटा प्रणाली
महाकाल मंदिर समिति भस्म आरती की अलग-अलग अनुमति जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, मीडिया और संत–पुजारियों को देती है। महापौर होने के नाते मुकेश टटवाल को प्रतिदिन 25 भस्म आरती अनुमतियाँ मिलती हैं। इसी कोटे की रद्दीकरण कार्रवाई वर्तमान विवाद का मुख्य कारण बन गई है।
अवंतिका गेट की पृष्ठभूमि
करीब दो वर्ष पहले महापौर की पहल पर महाकाल मंदिर प्रशासनिक कार्यालय के सामने अवंतिका गेट खोला गया था, जहाँ उज्जैन निवासी आधार कार्ड दिखाकर प्रवेश कर सकते थे। इसका उद्देश्य स्थानीय श्रद्धालुओं को शीघ्र दर्शन उपलब्ध कराना था।25 दिसंबर से अवंतिका गेट को अपना रेस्टोरेंट के पास स्थानांतरित किया गया है।महाकाल मंदिर परिसर में समय-समय पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रहती है।
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