नई दिल्ली। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण भारत में गहरा सकता है गैस संकट। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण देश में एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) की उपलब्धता को लेकर संकट गहराने लगा है।
नई दिल्ली। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण भारत में गहरा सकता है गैस संकट। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण देश में एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) की उपलब्धता को लेकर संकट गहराने लगा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और कतर द्वारा LNG उत्पादन रोकने से भारत में एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे ऊर्जा संकट गहरा गया है। मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण भारत में CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की कीमतें बढ़ने की आशंका जतायी जा रही है।
ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश कतर अपने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) प्लांट का उत्पादन रोक चुका है। कतर भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। पर वहां संघर्ष के कारण देश में गैस आपूर्ति रुकी हुई है। इससे औद्योगिक गैस आपूर्ति में 10-30% की कटौती की गई है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव से गैस आपूर्ति पर खतरा है। एसोसिएशन ऑफ सीजीडी एंटिटीज (ACE) ने भी सीएनजी और पीएनजी की कमी की चेतावनी दी है।
गैस आपूर्ति में 10-30% कटौती
देश में एलपीजी व पीएनजी के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल GAIL (इंडिया) लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने सोमवार देर रात ग्राहकों को सूचित किया कि गैस आवंटन कम किया जाएगा। विभिन्न औद्योगिक उपयोगकर्ताओं के लिए आवंटन में 10% से 30% के बीच कटौती का अनुमान है। भारत अपनी 90% गैस जरूरतें मिडिल ईस्ट से आयात करता है। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा LNG आयातक है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारी मात्रा में विदेशी आपूर्ति पर निर्भर है। इन आयातों का एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से आता है। अब आपूर्ति में व्यवधान (Supply Disruption) के डर से देश की सबसे बड़ी गैस आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी और गुजरात गैस लिमिटेड ने बुधवार को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसने अपने सप्लॉयर कतर एनर्जी और घरेलू खरीदारों को फोर्स मेज्योर (Force Majeure) की सूचना जारी कर दी है। इसकी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के कारण कंपनी के जहाजों का रास लफ्फान के लोडिंग पोर्ट तक न पहुंच पाना है। अमेरिका-ईरान संघर्ष ने इस क्षेत्र में ईंधन की खेप को बाधित कर दिया है।
गैस आपूर्ति में फोर्स मेज्योर लागू
पेट्रोनेट एलएनजी के बाद अब भारतीय गैस वितरण कंपनी गुजरात गैस लिमिटेड ने भी फोर्स मेज्योर लागू करने की घोषणा की है। दोनों कंपनियों ने बुधवार को घोषणा की कि वह अपने आपूर्ति अनुबंधों में फोर्स मेज्योर लागू करेगी, क्योंकि आरएलएनजी की उपलब्धता "गंभीर रूप से सीमित" हो गई है। शेयर बाजार को दी गई जानकारी में कंपनी ने बताया कि वह 6 मार्च से गैस की मात्रा में प्रतिबंध लगाएगी। फोर्स मेज्योर (Force Majeure) एक फ्रांसीसी शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ "सर्वोच्च शक्ति" है। यह अक्सर "ईश्वरीय कृत्य" (Act of God) जैसे प्राकृतिक आपदा, युद्ध, महामारी की स्थितियों में अनुबंधों को पूरा करने में बाधा आने पर कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। पश्चिम एशिया तनाव लंबा चलता है, तो भारत में कुकिंग गैस की भारी किल्लत हो सकती है। इसे देखते हुए पेट्रोनेट ने अपने एलएनजी टैंकरों दिशा, राही और असीम के लिए कतर एनर्जी को फोर्स मेज्योर नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही पेट्रोनेट ने अपने ग्राहकों गेल (इंडिया), इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम को भी फोर्स मेज्योर की सूचना दी है।
इस बीच भारत सरकार ने दावा किया है कि वर्तमान में देश में कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोमवार को आश्वासन दिया कि देश में कच्चे तेल और पेट्रोल, डीजल और एटीएफ सहित प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार है, ताकि पश्चिम एशिया में तनाव से उत्पन्न स्थिति से निपटा जा सके। साथ ही सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत रूस से अतिरिक्त आपूर्ति की योजना पर काम शुरू कर दिया है और देश में पर्याप्त ईंधन भंडार का आश्वासन दिया है। रूसी दूतावास के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा, ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान जारी रहने की स्थिति में हम भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार हैं।
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