बाराबंकी का प्रसिद्ध देवा मेला सूफियाना परंपरा, गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक विविधता का संदेश दे रहा है। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया।
बाराबंकी: 'देवा मेला' अपनी ऐतिहासिक परंपरा, सूफियाना रूहानियत और गंगा-जमुनी तहजीब के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। हजरत हाजी वारिस अली शाह की प्रेम, करुणा और मानवता की शिक्षाओं से जुड़ा यह आयोजन धर्म और समुदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर आपसी सौहार्द का संदेश देता है। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि देवा मेला साझा सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का प्रतीक है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि मेले में आने वाले जायरीनों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण मिले।
कव्वाली और आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में बांधा समां
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बहार सुगम संगीत प्रभाग के छात्र-छात्राओं ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद प्रभात नारायण दीक्षित द्वारा रचित कव्वाली 'तेरे जलवों के चर्चे सुन-सुनकर मैं आया हूं बाबा' ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। 33 छात्र-छात्राओं ने इसमें सहभागिता की। शिवराजे म्यूजिकल बैंड की टीम ने बॉलीवुड गीतों का मैशअप पेश कर दर्शकों की तालियां बटोरीं। अरुणोदय पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने 'महिषासुर मर्दिनी' गीत पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन आशीष पाठक ने किया।
देवा मेले में आज मोहम्मद दानिश की म्यूजिकल नाइट
'देवा मेले' में बुधवार, 28 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक खेलकूद मैदान में हॉकी प्रतियोगिता और ऑडिटोरियम में माध्यमिक शिक्षा विभाग के सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। शाम चार से सात बजे तक सुगम संगीत का आयोजन किया जाएगा। वहीं, शाम सात बजे से इंडियन आइडल फेम मोहम्मद दानिश की म्यूजिकल नाइट दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगी। आगामी दिनों में भी खेलकूद और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से मेले की रौनक बढ़ेगी। यह मेला स्थानीय व्यापारियों, दुकानदारों और कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा व कारोबार को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
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