प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

टाइगर रिजर्व में नियमों की खुली अनदेखी

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में सरकारी गाड़ी से पहुंचे रसूखदार, जंगल में शराब-सिगरेट पार्टी पर FIR

पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) की सुरक्षा व्यवस्था को ताक पर रखकर सरकारी संसाधन के खुलेआम दुरुपयोग और जंगल को दांव पर लगाने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में सरकारी गाड़ी से पहुंचे रसूखदार जंगल में शराब-सिगरेट पार्टी पर fir

Government Vehicle Misused Inside Pilibhit Tiger Reserve, FIR Registered |

पीलीभीत (उत्तर प्रदेश)। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) की सुरक्षा व्यवस्था को ताक पर रखकर सरकारी संसाधन के खुलेआम दुरुपयोग और जंगल को दांव पर लगाने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां आम नागरिकों के प्रवेश पर बेहद कड़े नियम लागू हैं, वहीं बेसिक शिक्षा विभाग की एक सरकारी गाड़ी में सवार होकर कुछ लोग देर रात जंगल के भीतर न सिर्फ दाखिल हुए, बल्कि वहां कथित तौर पर शराब और सिगरेट पार्टी भी की। वन विभाग की मुस्तैदी से एक बड़ा हादसा टल गया, जिसके बाद इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।

जंगल में सिगरेट से आग का बड़ा खतरा

यह पूरी घटना पीलीभीत टाइगर रिजर्व की माला रेंज की है। मई-जून के तपते महीने में पूरा जंगल सूखे पत्तों से भरा रहता है। ऐसे संवेदनशील समय और इलाके में बेसिक शिक्षा विभाग का वाहन देर रात अंदर पहुंच गया। गाड़ी में सवार लोग न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ा रहे थे, बल्कि जलती हुई सिगरेट भी जंगल में फेंक रहे थे। एक छोटी सी चिंगारी भी इस मौसम में भीषण आग का रूप ले सकती थी, जिससे वर्षों की संरक्षण मेहनत, हजारों कीमती पेड़ और बाघों समेत सैकड़ों वन्यजीव पलभर में राख हो सकते थे।

सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो गाड़ी सरकारी काम के लिए अलॉट है, वह निजी ऐश-ओ-आराम के लिए सुरक्षित टाइगर रिजर्व के भीतर कैसे पहुंच गई? क्या विभागीय अधिकारी इन वाहनों की निगरानी नहीं करते? जिले में पहले से ही यह चर्चा आम है कि कई विभागों के वाहन रात के समय अधिकारियों की गैर-मौजूदगी में भी सड़कों पर हूटर बजाते हुए दौड़ते हैं। यह सरकारी संसाधनों के खुलेआम दुरुपयोग की तरफ इशारा करता है।

वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत FIR दर्ज

मामला सामने आने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने तुरंत वाहन की पहचान की और वाहन स्वामी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। वन विभाग की गश्ती टीम की मुस्तैदी के कारण समय रहते संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिहं ने कहा, "जंगल में धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित है और ऐसी लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" डिप्टी डायरेक्टर के निर्देश पर आरोपों के आधार पर वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कड़े प्रावधानों के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।

राजनीतिक रसूख की चर्चा के बीच निष्पक्ष जांच पर निगाहें

इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल निष्पक्ष जांच को लेकर उठ रहा है। स्थानीय गलियारों में चर्चा है कि वाहन स्वामी का ताल्लुक एक बड़े राजनीतिक परिवार से है। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल तैर रहा है कि क्या सिर्फ नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी, या कानून वाकई सभी के लिए समान रूप से काम करेगा? अब देखना यह है कि जांच की आंच वास्तविक दोषियों तक पहुंचती है या रसूख के आगे सिस्टम सरेंडर कर देता है।

यह भी पढ़ें: सीएम योगी ने निभाया वादा, होमगार्ड जवानों को ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा स्वीकृत

Related to this topic: