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जमशेदजी टाटा ने अचानक ताज होटल बनाने का लिया...

जमशेदजी टाटा ने अचानक ताज होटल बनाने का लिया था फैसला

जबलपुर। ​जमशेदजी नुसरवानजी टाटा (1839–1904) को भारतीय उद्योग का पितामह माना जाता है। पिता ने पुजारी का...

जमशेदजी टाटा ने अचानक ताज होटल बनाने का लिया था फैसला

जमशेदजी टाटा ने अचानक ताज होटल बनाने का लिया था फैसला |

जबलपुर। ​जमशेदजी नुसरवानजी टाटा (1839–1904) को भारतीय उद्योग का पितामह माना जाता है। पिता ने पुजारी का पेशा छोड़ व्यापार का रास्ता अपनाया। ​जमशेदजी का जन्म गुजरात के नवसारी में एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके पूर्वज पारंपरिक रूप से पुजारी का काम करते थे, लेकिन उनके पिता नुसरवानजी टाटा ने इस परंपरा को तोड़ते हुए व्यापार को चुना। जमशेदजी 14 साल की उम्र में अपने पिता के साथ मुंबई आ गए और एलफिंस्टन कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की।

21 हजार रुपये से टाटा समूह की नींव रखी

1868 में मात्र 29 वर्ष की आयु में जमशेदजी ने 21,000 रुपये की पूंजी के साथ एक ट्रेडिंग कंपनी शुरू की। इंग्लैंड यात्रा के दौरान उन्होंने वहां की कपड़ा मिलों की तकनीक को समझा। 1877 में उन्होंने एम्प्रेस मिल्स की स्थापना की, जो भारत की पहली आधुनिक कपड़ा मिलों में से एक थी।

​1898 में जमशेदजी ने मुंबई के अपोलो बंदर इलाके में एक भव्य होटल बनाने का निर्णय लिया। यह फैसला चौंकाने वाला था, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा कारण था। कहा जाता है कि उन्हें एक यूरोपीय होटल में प्रवेश नहीं दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने भारत में एक ऐसा होटल बनाने की ठानी जिसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिले। 1903 में खुला ताज होटल उस समय बिजली, जर्मन लिफ्ट और अमेरिकी पंखों जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस था।

पहले इस्पात संयंत्र (Steel Plant) का सपना किया साकार

​जमशेदजी भारत में भारी उद्योग की जरूरत को समझते थे। उन्होंने इस्पात संयंत्र लगाने के लिए अमेरिकी विशेषज्ञों की मदद ली। हालांकि, वे अपने जीवनकाल में इसे साकार होते नहीं देख सके, लेकिन उनके विजन को उनके पुत्र दोराबजी टाटा ने 1907 में 'टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी' (अब टाटा स्टील) की स्थापना करके पूरा किया। जमशेदपुर में स्थापित यह संयंत्र भारत के औद्योगिक इतिहास का एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।

स्वच्छ ऊर्जा का भी संकल्प

​जमशेदजी केवल उद्योग ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और ऊर्जा के प्रति भी सचेत थे। उन्होंने 19वीं सदी के अंत में स्वच्छ बिजली देने का संकल्प लिया था। उन्होंने पश्चिमी घाट की नदियों की क्षमता को पहचाना और जलविद्युत परियोजना (Hydroelectric Project) की योजना बनाई, ताकि उद्योगों और शहरों को साफ ऊर्जा मिल सके।

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