झल्लार से दादाजी महाराज की 31वीं निशान पदयात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ खंडवा धाम के लिए रवाना हुई। करीब 10 दिनों में यात्रा धाम पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु 27 जुलाई को निशान अर्पित करेंगे।
बैतूल: झल्लार में दादाजी महाराज की भक्ति का शुभारंभ सबसे पहले सन् 1951 में मुंशीजी के नाम से प्रसिद्ध रामचरण सोनी द्वारा किया गया। उन्होंने ही इस क्षेत्र में सर्वप्रथम दादाजी महाराज की भक्ति की अलख जगाई। इसके बाद उनके छोटे भाई शंकरलाल सोनी के सुपुत्र सुरेश सोनी को सन् 1967 में दादाजी महाराज के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
दादाजी महाराज का मंदिर स्थापित कर नियमित शुरू की पूजा-अर्चना
सन् 1978 में सुरेश सोनी ने अपने निजी निवास पर छोटे स्वरूप में दादाजी महाराज का मंदिर स्थापित कर नियमित पूजा-अर्चना शुरू की, जो आज भी निरंतर जारी है। दादाजी महाराज की कृपा और भक्ति का प्रभाव समय के साथ निरंतर बढ़ता गया।
झल्लार से खंडवा धाम तक पैदल निशान यात्रा की परंपरा हुई शुरू
सन् 1996 से झल्लार से खंडवा धाम तक पैदल निशान यात्रा की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ जारी है। लगभग तीन साल पहले झल्लार में भव्य दादाजी महाराज मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ, जहां मूर्तिरूप में केशवानंद सरकार व हरिहर भोले सरकार विराजमान होकर समस्त श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं।
अपने 31वें वर्ष में पहुंची पावन निशान पदयात्रा
सन् 1996 से शुरू हुई यह पावन निशान पदयात्रा अब अपने 31वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इस वर्ष भी श्रद्धालुओं ने पूरे नगर में श्रद्धा और भक्ति के साथ निशान यात्रा निकाली। इसके बाद पदयात्री खंडवा धाम के लिए रवाना हुए। गांव की माताओं, बहनों, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों सहित समस्त ग्रामवासियों ने गांव के एक छोर पर पहुंचकर निशान पदयात्रियों को भावपूर्ण विदाई दी।
10 दिनों में खंडवा धाम पहुंचेगी यह पावन पदयात्रा
यह पवित्र पदयात्रा लगभग 10 दिनों में खंडवा धाम पहुंचेगी, जहां 27 जुलाई को श्रद्धालु दादाजी महाराज के चरणों में निशान अर्पित करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।
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