कर्नाटक में नगर निगम चुनाव से पहले 90 लाख वोटर आईडी कार्ड छपाई पर 20 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप। नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने डी.के. शिवकुमार को घेरा, CBI जांच की मांग की।
Leader of the Opposition in the Karnataka Legislative Assembly R Ashoka (File Photo) |
बेंगलुरु (कर्नाटक)। कर्नाटक में नगर निगम चुनावों से ठीक पहले वोटर आईडी कार्डों की छपाई को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता आर. अशोक ने राज्य सरकार पर 20 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर 90 लाख फर्जी कार्ड छपवाए गए और पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग की।
SIR प्रक्रिया के बावजूद टेंडर पर उठाए सवाल
आर. अशोक ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि 14 मई को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की घोषणा की गई थी। इसके ठीक एक दिन बाद राज्य सरकार ने आनन-फानन में टेंडर जारी कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने कहा, "कर्नाटक में वोटर आईडी कार्ड बनाने के नाम पर 20 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। जब केंद्रीय निर्वाचन आयोग पहले से ही नागरिकों को वोटर कार्ड जारी करता है, तो राज्य सरकार को अलग से 20 करोड़ रुपये जारी कर नया टेंडर निकालने की क्या जरूरत थी?"
बिना सत्यापन छपवाए 90 लाख कार्ड
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कार्ड छापने से पहले तय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। नियमों के मुताबिक अधिकारियों को घर-घर जाकर सत्यापन करना था और फोटो लेनी थी। लेकिन बिना किसी वेरिफिकेशन के 90 लाख कार्ड रातों-रात छपवा दिए गए।
31 लाख अतिरिक्त कार्डों का हिसाब कहां?
अशोक ने SIR के बाद जारी नई वोटर लिस्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार को घेरा:
| विवरण |
आंकड़े |
| छपवाए गए कुल कार्ड |
90 लाख |
| SIR के बाद कुल मतदाता |
59 लाख |
| अतिरिक्त/लापता कार्ड |
31 लाख |
उन्होंने पूछा कि जब बेंगलुरु में मतदाता ही लगभग 60 लाख हैं, तो 90 लाख कार्ड क्यों छापे गए? यह 30 से 31 लाख अतिरिक्त कार्ड आखिर किसके पास हैं और इनका क्या इस्तेमाल होना था?
"डी.के. शिवकुमार हैं असली वोट चोर"
आर. अशोक ने 100 फीसदी फर्जी कार्ड छापे जाने की आशंका जताई। उन्होंने चुनौती दी कि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार किसी भी एक विधानसभा क्षेत्र में जाकर खुद इन कार्डों को बांटकर दिखाएं।
राज्य सरकार के दिल्ली में प्रस्तावित 'वोट चोरी' प्रदर्शन पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, "आप दिल्ली में वोट चोरी का रोना रो रहे हैं, लेकिन कर्नाटक में वोट चोरी के असली सूत्रधार खुद डी.के. शिवकुमार हैं।"
खजाने की बदहाली के बीच सरकारी पैसे की बर्बादी
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल राज्य सरकार के हलफनामे का जिक्र करते हुए अशोक ने कहा कि जब सरकार ने खुद स्वीकार किया था कि चुनाव SIR लिस्ट के आधार पर होंगे, तब भी 20 करोड़ रुपये क्यों लुटाए गए?
उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार खजाने में पैसे न होने की बात कहकर किसानों को राहत देने में कतराती है, वहीं दूसरी तरफ जनता की गाढ़ी कमाई के 20 करोड़ रुपये घोटाले की भेंट चढ़ा दिए गए। अशोक ने दोहराया कि यह सरकार वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर पूरी तरह विफल हो चुकी है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सिर्फ CBI ही कर सकती है।
(इनपुट: ANI)
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