नर्मदापुरम। पिपरिया में एक आदिवासी महिला के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और फिर उसकी बेरहमी से हत्या करने के...
नर्मदापुरम। पिपरिया में एक आदिवासी महिला के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और फिर उसकी बेरहमी से हत्या करने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। तीन लोगों ने एक आदिवासी महिला के साथ गैंगरेप किया और उसके बाद उसकी गर्दन मरोड़कर हत्या कर दी थी।
तीनों दोषियों को अंतिम सांस तक उम्रकैद
अदालत ने तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसका मतलब है कि वे अपनी अंतिम सांस तक जेल में ही रहेंगे। यह सनसनीखेज घटना लगभग तीन साल पहले हुई थी। दोषी पंजाब के पटियाला के रहने वाले हैं।
सजा में यह प्रावधान
भारतीय कानून के तहत गैंगरेप और हत्या जैसे जघन्य अपराधों के लिए बहुत सख्त प्रावधान हैं। गैंगरेप 376D 70(1) में कम से कम 20 साल से लेकर उम्रकैद (शेष प्राकृतिक जीवन तक) की सजा का प्रावधान है। 18 वर्ष से कम उम्र के साथ गैंगरेप पर 376DB 70(2) उम्रकैद (शेष प्राकृतिक जीवन तक) या मृत्युदंड (फांसी) की सजा का प्रावधान है। इस मामले में रेप के दौरान मौत (हत्या) 376A 65(2) हो गई हो तो।
उम्रकैद का क्या है अर्थ
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, "उम्रकैद" का मतलब 14 या 20 साल नहीं, बल्कि दोषी के "शेष प्राकृतिक जीवन" (अंतिम सांस तक) जेल में बिताना होता है। हालांकि, सरकार विशेष परिस्थितियों में सजा कम कर सकती है, लेकिन गैंगरेप और हत्या जैसे मामलों में यह बहुत दुर्लभ है।
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