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लव जिहाद बहस पर मौलाना ने दी राय

'लव जिहाद' बनाम 'मोहब्बत' की बहस पर बोले मौलाना- जब मियाँ-बीवी राज़ी, तो क्या करेगा क़ाज़ी?

अभिनेता आमिर ख़ान की तीसरी शादी को लेकर देशभर में तरह-तरह की चर्चाएँ और टिप्पणियाँ की जा रही हैं।

 लव जिहाद बनाम मोहब्बत की बहस पर बोले मौलाना- जब मियाँ-बीवी राज़ी तो क्या करेगा क़ाज़ी

Maulana Speaks on 'Love Jihad' Debate |

सहारनपुर {उत्तर प्रदेश}: अभिनेता आमिर ख़ान की तीसरी शादी को लेकर देशभर में तरह-तरह की चर्चाएँ और टिप्पणियाँ की जा रही हैं। इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए मशहूर देवबंदी उलेमा मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने कहा कि किसी भी मामले में दोहरे मापदंड (डबल स्टैंडर्ड) अपनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, “जब मियाँ-बीवी राज़ी, तो क्या करेगा क़ाज़ी?” अगर कोई बालिग़ व्यक्ति अपनी मर्ज़ी से क़ानून के दायरे में कोई फ़ैसला करता है, तो हर व्यक्ति का फ़र्ज़ नहीं कि वह उस पर फ़ैसले सुनाता फिरे।

'लव जिहाद' शब्द के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति

मौलाना गोरा ने कहा कि अफ़सोस की बात यह है कि जब कोई मुसलमान ऐसा करता है तो उस पर तरह-तरह के इल्ज़ाम लगाए जाते हैं, यहाँ तक कि उसे “लव जिहाद” जैसे नामों से जोड़ दिया जाता है। लेकिन जब यही काम किसी दूसरे समुदाय का व्यक्ति करता है तो मीडिया में “मोहब्बत के आगे मज़हब की दीवार टूट गई” और ऐसे ही दूसरे जुमलों के साथ उसे पेश किया जाता है।

दोहरे मापदंड छोड़ने की अपील

उन्होंने कहा कि आख़िर हमारी सोच में यह दोहरापन क्यों है? हमें दूसरों के निजी मामलों को बेवजह विवाद का विषय बनाने के बजाय अपनी सोच और अपने रवैये की इस्लाह करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि देश के सामने शिक्षा, बेरोज़गारी, महंगाई, सामाजिक सद्भाव और तरक़्क़ी जैसे अनेक अहम मुद्दे मौजूद हैं। हमारी तवज्जो उन विषयों पर होनी चाहिए जो समाज और देश के लिए वास्तव में फ़ायदेमंद हों।

'न्यायपूर्ण नज़रिया ही सभ्य समाज की पहचान'

मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने कहा कि किसी भी मुद्दे पर न्यायपूर्ण और एक जैसा नज़रिया अपनाना ही इंसाफ़ और सभ्य समाज की पहचान है।

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