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सरकारी स्कूल में हेडमास्टर पर गंभीर आरोप

मुरैना के सरकारी स्कूल में हेडमास्टर पर गंभीर आरोप, ₹4500 देकर निजी महिला से पढ़ाने का दावा

मुरैना के कैलारस ब्लॉक के सरकारी स्कूल में हेडमास्टर पर अपनी जगह निजी महिला से बच्चों को पढ़वाने का आरोप है। महिला को ₹4500 प्रतिमाह देने की बात सामने आई है।

मुरैना के सरकारी स्कूल में हेडमास्टर पर गंभीर आरोप ₹4500 देकर निजी महिला से पढ़ाने का दावा

Morena School: Headmaster Accused of Paying ₹4,500 to Private Woman |

मुरैना (मध्य प्रदेश)। सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन कैलारस ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक विद्यालय पोखर का पूरा में सामने आए कथित मामले ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय में पदस्थ हेडमास्टर अमरलाल रावत पर आरोप है कि उन्होंने अपनी जगह एक निजी महिला को कथित तौर पर 4500 रुपये प्रतिमाह देकर बच्चों को पढ़ाने के लिए लगा रखा है।

निजी महिला की नियुक्ति पर उठे सवाल

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस महिला से विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने का काम लिए जाने का आरोप है, वह न तो अतिथि शिक्षक है और न ही विद्यालय में किसी अधिकृत पद पर पदस्थ होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किस अधिकार के तहत एक निजी व्यक्ति शासकीय विद्यालय में बच्चों को पढ़ा रहा था?

पहले हाजिरी, फिर गायब होने का आरोप

स्थानीय लोगों के मुताबिक हेडमास्टर अमरलाल रावत विद्यालय पहुंचकर उपस्थिति दर्ज कराते हैं और इसके बाद कथित रूप से विद्यालय से चले जाते हैं। उनके स्थान पर प्रीति रावत द्वारा बच्चों को पढ़ाने और स्कूल की व्यवस्था संभालने का आरोप है।

लंबे समय से चल रही थी कथित व्यवस्था

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यह कथित व्यवस्था कोई एक-दो दिन से नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

महिला ने खुद बताई 4500 रुपये मिलने की बात

मामले में प्रीति रावत का कथित बयान भी सामने आया है। उसके अनुसार, उसे हर महीने 4500 रुपये दिए जाते हैं और उससे कहा जाता है कि वह हेडमास्टर की जगह विद्यालय में बच्चों को पढ़ाए।

जांच सही हुई तो व्यवस्था पर उठेंगे सवाल

यदि जांच में यह बात सही पाई जाती है तो यह सरकारी स्कूलों की निगरानी और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर सकती है। आखिर एक शासकीय शिक्षक अपनी जगह किसी निजी व्यक्ति से बच्चों को पढ़ाने का काम किस आधार पर करवा सकता है।

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