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बच्चों की हत्या कर बलान नदी में फेंका

मासूम बच्चों के हत्या की आरोपी मां और उसके प्रेमी को फांसी की सजा

झंझारपुर व्यवहार न्यायालय ने इस अपराध को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है।

मासूम बच्चों के हत्या की आरोपी मां और उसके प्रेमी को फांसी की सजा

Mother and her lover sentenced to death for the murder of innocent children |

मधुबनी,(बिहार)। जिले में वर्ष 2023 के चर्चित दोहरे बाल हत्या कांड में झंझारपुर व्यवहार न्यायालय ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक रंजन ने चार वर्षीय बेटे प्रिंस कुमार और डेढ़ वर्षीय बेटी सृष्टि कुमारी की हत्या के मामले में दोषी मां अनीता कुमारी और उसके प्रेमी जयप्रकाश मंडल को फांसी की सजा सुनाई है।

दोनों मासूम बच्चों की बेरहमी से हत्या

अदालत ने कहा,"एक मां पर अपने बच्चों की सुरक्षा और परवरिश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।" लेकिन, अनीता ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर दोनों मासूम बच्चों की बेरहमी से हत्या कर दी। अदालत ने इस अपराध को "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" श्रेणी में रखते हुए मृत्युदंड सुनाया। झंझारपुर कोर्ट के इतिहास में यह पहला मामला है, जिसमें किसी दोषी को फांसी की सजा दी गई है।

जुर्माना और अन्य सजाएं

अदालत ने दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत फांसी की सजा के साथ 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं देने पर छह-छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा, साक्ष्य मिटाने के आरोप में धारा 201/34 के तहत सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन-तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।

प्रेम संबंध के लिए रची गई हत्या की साजिश

मामला 3 जुलाई 2023 का है। अनीता कुमारी अपने दोनों बच्चों को मायके ले जाने का बहाना बनाकर घर से निकली। रास्ते में बलान नदी पर खाप पुल के पास उसका प्रेमी जयप्रकाश मंडल मिला। दोनों ने मिलकर पहले बच्चों का गला घोंटकर हत्या की और फिर शवों को बलान नदी में फेंक दिया।

ग्रामीणों ने किया पुलिस के हवाले

घटना के समय पुल के पास खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों को दोनों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। लोगों ने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया, उनकी पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया। पिता प्रमोद कुमार साफी की शिकायत पर घोंघरडीहा थाना में केस संख्या 114/2023 दर्ज किया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

सात दिन बाद मिला बेटी का शव

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने नदी में शवों की तलाश शुरू की। घटना के सात दिन बाद 10 जुलाई 2023 को बेटी का शव बरामद हुआ, जबकि बेटे का शव आज तक नहीं मिल सका।

सबूतों के आधार पर सुनाया फैसला

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील देव शंकर झा ने इसे समाज और मानवता को झकझोर देने वाला अपराध बताते हुए मृत्युदंड की मांग की। अदालत ने गवाहों के बयान और पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी करार दिया। 28 पृष्ठों के फैसले में अदालत ने दोनों अभियुक्तों को धारा 302, 201 और 34 के तहत दोषी ठहराया।

हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद होगी आगे की कार्रवाई

कानूनी प्रक्रिया के तहत मृत्युदंड की सजा तब तक लागू नहीं होगी, जब तक इसकी पुष्टि पटना हाईकोर्ट नहीं कर देता। इसके लिए फैसले से जुड़े सभी दस्तावेज हाईकोर्ट भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को झंझारपुर उपकारा से केंद्रीय कारागार में स्थानांतरित किया गया, क्योंकि उपकारा में पांच वर्ष से अधिक सजा पाने वाले कैदियों को रखने का प्रावधान नहीं है।

पिता का छलका दर्द

फैसले के बाद बच्चों के पिता प्रमोद कुमार साफी भावुक हो गए। उन्होंने कहा, "कोर्ट ने न्याय किया है। अब बस यही चाहता हूं, कि दोनों दोषियों को जल्द से जल्द फांसी मिले, ताकि मेरे दोनों बच्चों की आत्मा को शांति मिल सके। 2018 में मेरी शादी अनीता से हुई थी। कभी नहीं सोचा था, कि वह अपने ही बच्चों के साथ इतनी क्रूरता करेगी। उस समय मैं काम के सिलसिले में कोलकाता में था। घटना की सूचना मिलते ही घर पहुंचा, लेकिन तब तक मेरी दुनिया उजड़ चुकी थी।"

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