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वन विभाग की लापरवाही से झुलसी महिला

सिंगरौली में वन विभाग की लापरवाही से झुलसी महिला, 2 किमी खाट पर ले जाकर बचाई गई जान

सिंगरौली के जंगल में बिजली तार की चपेट में आई महिला को एंबुलेंस न मिलने पर ग्रामीणों ने खाट पर 2 किमी ले जाकर सड़क तक पहुंचाया। वन विभाग की लापरवाही पर ग्रामीणों में आक्रोश है।

सिंगरौली में वन विभाग की लापरवाही से झुलसी महिला 2 किमी खाट पर ले जाकर बचाई गई जान

Negligence in Singrauli Forest Area Leaves Burnt Woman Carried on Cot for 2 km |

सिंगरौली (मध्यप्रदेश)। जिले के सरई रेंज अंतर्गत आने वाले बीट गन्नई और महरैल के जंगलों में वन विभाग की उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। विभाग की हठधर्मिता के चलते एक महिला को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी। बिजली की चपेट में आने से झुलसी महिला को समय पर एंबुलेंस न मिल पाने के कारण ग्रामीणों को उसे खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा।

​क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, महरैल जंगल के रास्ते से गुजर रही एक महिला अचानक वहां पड़े बिजली के तार की चपेट में आ गई। हाई-वोल्टेज करंट लगने से महिला बुरी तरह झुलस गई और उसकी स्थिति नाजुक हो गई। घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने आनन-फानन में एंबुलेंस और डायल 112 को सूचना दी। लेकिन, वन विभाग द्वारा जंगल का रास्ता बंद कर दिए जाने के कारण आपातकालीन वाहन घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके।

​खाट बनी सहारा, 2 किलोमीटर तक पैदल चले ग्रामीण

समय बीतता जा रहा था और महिला की हालत बिगड़ रही थी। जब कोई सरकारी मदद मौके पर नहीं पहुंच सकी, तो ग्रामीणों ने हार नहीं मानी। लोगों ने बांस-बल्ली और एक पुरानी खाट की मदद से 'स्ट्रेचर' बनाया और झुलसी हुई महिला को उस पर लिटाकर दुर्गम रास्तों से होते हुए करीब 2 किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से महिला को निजी वाहन के जरिए आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ फिलहाल उसका इलाज जारी है।

​तीन माह से बंद है रास्ता, अनसुनी कर रहा विभाग

ग्रामीणों का कहना है कि यह हादसा वन विभाग की लापरवाही का प्रत्यक्ष परिणाम है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, वे पिछले तीन महीनों से लगातार वन विभाग के अधिकारियों से जंगल का रास्ता खोलने की गुहार लगा रहे हैं, ताकि आवागमन सुगम हो सके। लेकिन, विभागीय अधिकारी उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना कोई वैकल्पिक मार्ग दिए रास्ता बंद कर देना लोगों की जान से खिलवाड़ करने जैसा है।

​प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यदि समय पर एंबुलेंस पहुंच जाती, तो महिला की स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। अब स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।

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