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युवती को अपने पति के साथ रहने की अनुमति

माता-पिता की चिंताएं जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता से ऊपर नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक 18 वर्षीय युवती को अपने पति के साथ रहने की अनुमति देते हुए कहा कि माता पिता की चिंताएं अपना जीवन साथी चुनने की स्वतंत्रता से ऊपर नही है।

माता-पिता की चिंताएं जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता से ऊपर नहीं इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय |

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 18 वर्षीय युवती को अपने पति के साथ रहने की अनुमति देते हुए कहा कि माता पिता की चिंताएं एक वयस्क व्यक्ति को अपना जीवन साथी चुनने की संविधान के तहत मिली स्वतंत्रता से ऊपर नहीं हो सकती।

युवती और उसके पति की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश

न्यायमूर्ति संदीप जैन ने अधिकारियों को युवती और उसके पति की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि माता पिता की चिंताएं हालांकि जायज हैं, लेकिन वे एक वयस्क व्यक्ति को संवैधानिक रूप से मिली स्वतंत्रता से ऊपर नहीं हैं। अपना जीवन साथी चुनने का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सम्मान का पहलू है और राज्य और उसकी संस्थाओं के लिए जरूरी है कि वे ऐसी स्वायत्तता का सम्मान करें।

कानूनी रूप से मोहित की पत्नी है युवती

सुनवाई के दौरान, युवती के पति की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि वह कानूनी रूप से विवाहित उसके मुवक्किल मोहित की पत्नी है और इनकी शादी इनके माता पिता की इच्छा के विरुद्ध हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के बाद लड़की को उसके पिता और रिश्तेदारों ने अवैध रूप से रोककर रखा है।

बदायूं में सक्षम अदालत के समक्ष शिकायत

उन्होंने बताया कि इस मामले में जब कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई तो लड़की ने स्वयं भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत 20 जुलाई, 2026 को बदायूं में सक्षम अदालत के समक्ष शिकायत कर अपने पिता और रिश्तेदारों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया। वहीं दूसरी ओर, महिला के पिता ने इस बात से इनकार किया कि उनकी बेटी ने मोहित से विवाह किया था। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अपनी इच्छा से अपने माता पिता के घर में रह रही है और उसे अवैध रूप से रोक कर नहीं रखा गया है।

जीवन साथी चुनने और अपनी पसंद की जगह पर रहने के लिए स्वतंत्र

राज्य सरकार के वकील ने कहा कि पिता ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई जिसके बाद लड़की को बरामद कर उसे उसके पिता को सौंप दिया गया था। इससे पूर्व 31 अगस्त को उच्च न्यायालय ने दस्तावेजों पर गौर करने के बाद पाया कि लड़की वयस्क हो चुकी है और इसलिए वह अपना जीवन साथी चुनने और अपनी पसंद की जगह पर रहने के लिए स्वतंत्र है।

लड़की को अदालत में पेश करने का निर्देश

यह पता लगाने के लिए कि क्या वह स्वेच्छा से अपने माता पिता के घर में रह रही है या उसे अवैध रूप से रोककर रखा गया है, अदालत ने लड़की को पेश करने का निर्देश दिया था। सात सितंबर को जब लड़की को अदालत के समक्ष पेश किया गया तो न्यायमूर्ती संदीप जैन ने उसकी उम्र, इच्छा और किन परिस्थितियों में वह रह रही है, इसका पता लगाने के लिए लड़की से बातचीत की।

लड़की की जन्म तिथि आठ जून, 2008

लड़की ने बताया कि उसकी जन्म तिथि आठ जून, 2008 है और वह बालिग हो चुकी है। लड़की ने बताया कि उसने अपनी इच्छा से 18 जुलाई, 2026 को मोहित से शादी की और वह अपने पति के साथ पत्नी के तौर पर ससुराल में रहने की इच्छुक है। लड़के ने भी शादी की बात स्वीकार की और कहा कि वह पति के तौर पर लड़की के साथ रहने का इच्छुक है। लड़की के पिता ने भी अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि उसकी बेटी बालिग हो चुकी है। (इनपुटः भाषा)

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