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2029 तक रक्षा उत्पादन में बड़ा उछाल

2029 तक रक्षा उत्पादन 3 लाख करोड़ और निर्यात 50 हजार करोड़ रुपये करने का लक्ष्य: राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को जैसलमेर में 'भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण' पर रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की।

2029 तक रक्षा उत्पादन 3 लाख करोड़ और निर्यात 50 हजार करोड़ रुपये करने का लक्ष्य राजनाथ सिंह

Rajnath Singh Sets Big Defence Production Target for 2029 |

जैसलमेर (राजस्थान): रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को जैसलमेर में 'भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण' पर रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उभरती सुरक्षा चुनौतियों, बदलते युद्ध परिदृश्यों, तकनीकी प्रगति और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप एक तकनीकी रूप से सक्षम, आधुनिक और संचालन रूप से अधिक चुस्त सेना के निर्माण की आवश्यकता पर व्यापक चर्चा हुई।

रक्षा बजट बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ

राजनाथ सिंह ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। उन्होंने कहा, "इसमें आधुनिकीकरण और पूंजीगत अधिग्रहण के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत परिव्यय शामिल है। यह घरेलू रक्षा उद्योग और विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा बलों की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।" रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। रक्षा निर्यात, जो 2014 में 2,000 करोड़ रुपये से कम था, अब बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाना है।

आधुनिक युद्ध में तकनीक की भूमिका पर दिया जोर

राजनाथ सिंह ने आधुनिक युद्ध में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि तकनीकी प्रगति संघर्षों की बदलती प्रकृति का अभिन्न अंग है। उन्होंने उन्नत हथियारों, मिसाइलों और प्रणालियों को विकसित करने में डीआरडीओ की पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र को समान अवसर दे रही है और रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से लेकर बड़े निगमों तक सभी की भागीदारी बढ़ा रही है। इसे राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण बताते हुए उन्होंने देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में निजी उद्योग के बढ़ते योगदान पर संतोष व्यक्त किया।

AI, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं पर भी चर्चा

बैठक में भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उभरती और विघटनकारी प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर भी चर्चा की गई। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वायत्त प्रणालियां, मानवरहित प्लेटफॉर्म, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताएं, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तथा उन्नत संचार प्रणालियां शामिल हैं।

ANI

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