गोरखपुर में सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम के नेतृत्व में पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मंडलायुक्त से मुलाकात कर शिक्षक एमएलसी चुनाव निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में कराने की मांग की।
गोरखपुर: शिक्षक एमएलसी चुनाव को निष्पक्ष, स्वतंत्र और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम के नेतृत्व में पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने बुधवार को गोरखपुर मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचकर मंडलायुक्त से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से विभिन्न जनपदों में शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा शिक्षकों और विशेष रूप से स्ववित्तपोषित विद्यालयों के प्रबंधकों पर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाए जाने का मुद्दा उठाया गया।
निष्पक्ष चुनाव और दबावमुक्त मतदान की मांग
सपा नेताओं ने कहा कि शिक्षक एमएलसी चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें शिक्षक मतदाताओं को अपनी स्वतंत्र इच्छा से मतदान करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। किसी भी शिक्षक, विद्यालय प्रबंधक या अन्य मतदाता पर किसी राजनीतिक दल और प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने के लिए दबाव बनाया जाना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की भावना के विपरीत है। चुनाव में सभी प्रत्याशियों को समान अवसर मिलना चाहिए। मतदाताओं को बिना किसी भय, दबाव या हस्तक्षेप के अपने मताधिकार का प्रयोग करने का वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में दबाव बनाने का आरोप
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि विभिन्न जनपदों में शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा शिक्षकों और स्ववित्तपोषित विद्यालयों के प्रबंधकों को भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान के लिए प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। सपा नेताओं ने इस मामले को गंभीर बताते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव में किसी भी प्रकार के अनुचित दबाव की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि शिक्षक मतदाताओं के बीच किसी तरह का भय या असमंजस पैदा न हो।
अधिकारियों की भूमिका पर निगरानी और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मंडलायुक्त से मांग की है कि शिक्षक एमएलसी चुनाव के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर नजर रखी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी अधिकारी अपने पद का इस्तेमाल किसी विशेष प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कराने के लिए न करे। अगर इस तरह की शिकायतों की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों को समान अवसर देते हुए चुनाव को पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया जाए।
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