STF ने एमकेपी कॉलेज स्थित महादेव डिजिटल सेंटर में उन्नत तकनीक का उपयोग कर SSC मल्टी-टास्किंग (ग्रुप-C) क्लास 4 परीक्षा में धोखाधड़ी की सुविधा देने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम ने देहरादून के एमकेपी कॉलेज स्थित महादेव डिजिटल सेंटर में उन्नत तकनीक का उपयोग कर SSC मल्टी-टास्किंग (ग्रुप-C) क्लास 4 परीक्षा में धोखाधड़ी की सुविधा देने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
नकली आईपी एड्रेस से चल रही थी धोखाधड़ी
STF के इंस्पेक्टर जनरल नीलेश आनंद भारने ने एक वीडियो जारी कर बताया कि अभ्यर्थियों से पैसे लेकर ऑनलाइन परीक्षा पास कराने का झांसा दिया जा रहा था और नकली आईपी एड्रेस के इस्तेमाल से धोखाधड़ी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि यह बड़ा ऑपरेशन उत्तर प्रदेश STF के सहयोग से किया गया।
एमकेपी कॉलेज में चल रहा था महादेव डिजिटल सेंटर
उन्होंने कहा कि, "महादेव डिजिटल सेंटर देहरादून के एमकेपी कॉलेज में चल रहा था। यहां SSC मल्टी-टास्किंग (ग्रुप-C) क्लास 4 की परीक्षा आयोजित की जा रही थी। नकली आईपी एड्रेस का उपयोग कर ऑनलाइन परीक्षाओं को बायपास किया जा रहा था और पेपर में धोखाधड़ी की सुविधा दी जा रही थी। लोगों को लुभाया जाता था और उनसे पैसे लिए जाते थे। उत्तराखंड STF टीम ने यूपी STF के सहयोग से इस पर काम किया। यह STF द्वारा किया गया एक बड़ा ऑपरेशन है।"
गिरोह झूठे वादों से अभ्यर्थियों को कर रहा था गुमराह
यह कार्रवाई उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सितंबर 2025 में लागू किए गए सख्त धोखाधड़ी विरोधी कानून के तहत की गई है। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया जो अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने में मदद करने के झूठे वादों से गुमराह कर रहा था।
माफिया किंगपिन हकम सिंह व उसका सहयोगी गिरफ्तार
पुलिस ने धोखाधड़ी माफिया किंगपिन हकम सिंह और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कथित तौर पर अभ्यर्थियों से 12 से 15 लाख रुपये तक की मांग की थी और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) परीक्षा में सफलता की गारंटी का वादा किया था।
झूठा आश्वासन देकर कर रहे थे बड़ी रकम की मांग
असामाजिक तत्वों द्वारा अभ्यर्थियों को झूठे वादों से लुभाने की संभावना को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस और STF संदिग्ध लोगों पर कड़ी निगरानी बनाए हुए थी। इसके बाद उन्हें गोपनीय सूचना मिली कि एक गिरोह अभ्यर्थियों को निशाना बना रहा था, उन्हें परीक्षा पास कराने का झूठा आश्वासन देकर गुमराह कर रहा था और बड़ी रकम की मांग कर रहा था।
फेल होने पर राशि समायोजित करने का देते आश्वासन
गिरोह की योजना थी कि अगर उम्मीदवार खुद से परीक्षा पास कर लेते हैं तो पैसे हड़प लिए जाएं। अगर कोई उम्मीदवार फेल हो जाता, तो वे अभ्यर्थियों को यह दावा करके फंसाए रखने का इरादा रखते थे कि राशि भविष्य की परीक्षाओं के लिए समायोजित कर दी जाएगी। जांच से इस बात की पुष्टि हुई कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता या गोपनीयता में कोई उल्लंघन नहीं हुआ था।
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