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यूपी में बगैर प्रवेश परीक्षा एडमिशन लेने लाले...

यूपी में बगैर प्रवेश परीक्षा एडमिशन लेने लाले छात्रों की भी होगी शुल्क भरपाई

उत्तर प्रदेश में शिक्षण संस्थानों में बगैर प्रवेश परीक्षा दिये सीधे दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति के साथ शुल्क भरपाई की जाएगी। योगी सरकार इस संबध में नियमों में बदलाव करेगी।

यूपी में बगैर प्रवेश परीक्षा एडमिशन लेने लाले छात्रों की भी होगी शुल्क भरपाई

Students admitted in UP without entrance exams will also get fee reimbursement |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षण संस्थानों में बगैर प्रवेश परीक्षा दिये सीधे दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति के साथ शुल्क भरपाई की जाएगी। योगी सरकार इस संबध में नियमों में बदलाव करेगी। इस फैसले के लागू होने से 300-400 करोड़ रुपये व्यय भार बढ़ेगा।

समाज कल्याण विभाग ने भ्रष्टाचार के कारण 2018-19 से बंद करा दिया था यह योजना

यूपी के समाज कल्याण विभाग ने सामान्य, अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को यह सुविधा वर्ष 2018-19 से बंद कर दी थी। उस समय सीधे एडमिशन देने के मामलों में काफी घपले सामने आए थे। तब इस श्रेणी में एडमिशन लेने वाले छात्रों की कुल संख्या करीब 80 हजार थी। इस कैटेगरी में अधिकतर अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों का प्रवेश दिखाने के मामले सामने आए थे। विभिन्न पाठ्यक्रमों में पहले साल योजना का लाभ लेने के बाद बड़ी संख्या में छात्र गायब हो जाते थे। पर अब पुराने नियम बहाल होंगे।

सरकार के इस फैसले से बढ़ेगा 300-400 करोड़ रुपये व्यय भार

इस बदलाव का लाभ किसी राज्य या राष्ट्र स्तरीय प्रवेश परीक्षा में बिना आवेदन किए सीधे निजी संस्थानों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा। एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों में इंजीनियरिंग, फॉर्मेसी और मैनेजमेंट कोर्सेज में दाखिला लेने वाले छात्रों को अब छात्रवृति मिल सकेगी। जानकार बताते हैं कि इस फैसले के लागू होने से 300-400 करोड़ रुपये व्यय भार बढ़ेगा। इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने पर एक लाख और छात्र योजना से लाभांवित हो सकेंगे। वर्तमान में सिर्फ अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को ही बिना काउंसिलिंग के सीधे दाखिला लेने पर योजना का लाभ मिलता है।

एससी-एसटी छात्रों की वापस होती है पूरी फीस

उत्तर प्रदेश में ढाई लाख रुपये तक सालाना आमदनी वाले एससी-एसटी परिवारों के छात्रों और दो लाख रुपये तक सालाना आमदनी वाले अन्य वर्गों के परिवारों के छात्रों को इस योजना का लाभ मिलता है। सामान्य, पिछड़े व अल्पसंख्यक छात्रों को अधिकतम 50 हजार रुपये की शुल्क भरपाई होती है, जबकि अनुसूचित जाति व जनजाति की पूरी फीस वापस की जाती है।

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