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आंखों में आंसू की लय...

आंखों में आंसू की लय, साथ में धनिया की बोरियां और विलाप करता अन्नदाता

गुना। पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि अपनी फसल बेचने के लिए मंडी में रोते किसान की तस्वीर बेहद विचलित...

आंखों में आंसू की लय साथ में धनिया की बोरियां और विलाप करता अन्नदाता

आंखों में आंसू की लय, साथ में धनिया की बोरियां और विलाप करता अन्नदाता |

गुना। पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि अपनी फसल बेचने के लिए मंडी में रोते किसान की तस्वीर बेहद विचलित करने वाली है। गुना जिले की नानाखेड़ी कृषि उपज मंडी में तेज धूप के बीच ताजा कटी हुई धनिया और सरसों की बोरियों के बीच एक किसान हाथ जोड़कर खड़ा था, उसकी आंखों में आंसू थे।

वह बार-बार विनती कर रहा था, “मेरी फसल खरीद लीजिए. कल मेरी बेटी की शादी है।” मंगलवार सुबह मंडी की नीलामी प्रक्रिया एक मार्केट इंस्पेक्टर से जुड़े विवाद के बादई। 

इंस्पेक्टर नशे में थे

किसानों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा नशे में थे और नीलामी के दौरान तानाशाहीपूर्ण व्यवहार कर रहे थे। विवाद तब शुरू हुआ, जब एक किसान की धनिया की फसल पर 5,700 रुपये प्रति क्विंटल की सबसे ऊंची बोली लगी, लेकिन इंस्पेक्टर ने पर्ची पर कथित रूप से 5,400 रुपये दर्ज कर दिए। जब किसान ने 300 रुपये के इस अंतर पर विरोध जताया तो मामला बढ़ गया

इंस्पेक्टर ने किया अभद्र भाषा का प्रयोग

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इंस्पेक्टर अभद्र भाषा पर उतर आए, जिससे व्यापारी भी नाराज हो गए। विरोध में व्यापारियों ने बोली लगाना बंद कर दिया और मंडी में खरीद पूरी तरह रोक दी। सुबह 7 बजे से मंडी पहुंचे कई किसानों के लिए यह रुकावट सिर्फ देरी नहीं, बल्कि उससे कहीं ज्यादा गंभीर समस्या बन गई।

बेटी की शादी के लिए धनिया का फसल लेकर आया था

इनमें श्रीपुरचक गांव का एक किसान भी था, जो अपनी बेटी की शादी के लिए पैसे जुटाने की उम्मीद में धनिया की फसल लेकर आया था। मंडी परिसर में हाथ जोड़कर उसने अधिकारियों और व्यापारियों से गुहार लगाई,  “कल मेरी बेटी की शादी है... टीका समारोह के लिए पैसे चाहिए। अगर आज मेरी फसल नहीं बिकी तो शादी बिगड़ जाएगी।” लेकिन उसके आंसू पोंछने कोई आगे नहीं आया। मंडी कई घंटों तक बंद रही।

नाराज किसानों ने किया विरोध प्रदर्शन

स्थिति से नाराज किसानों ने आखिरकार सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। दर्जनों किसानों ने एबी रोड राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया, जिससे यातायात ठप हो गया। करीब आधे घंटे तक सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बाद में कैंट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और किसानों को समझाकर रास्ता खुलवाया। किसानों ने कहा कि मंडी बंद होने से वे हताशा की स्थिति में पहुंच गए। किसान गिरिराज यादव ने कहा कि इस अव्यवस्था के कारण उन्हें ट्रैक्टर-परिवहन पर दो बार खर्च करना पड़ा।

उन्होंने कहा, “मैं सुबह सात बजे यहां आया था। बोली 5,700 रुपये लगी थी, लेकिन 300 रुपये कम कर दिए गए। यहां कोई प्रशासन काम नहीं कर रहा। सब कुछ मनमाने ढंग से हो रहा है। क्या किसानों का कोई अस्तित्व नहीं है?” उन्होंने यह भी कहा कि कई किसान शादी-ब्याह और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपनी उपज बेचकर पैसे जुटाने मंडी पहुंचे थे।

फसल बेचने रोते किसान की तस्वीर पीड़ादायक है

पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि अपनी ही फसल बेचने के लिए मंडी में रोते किसान की तस्वीर बहुत पीड़ादायक है। उन्होंने कहा, “कल उसकी बेटी की शादी है, और किसान अधिकारियों से अपनी उपज खरीदने की भीख मांग रहा है। इस देश का अन्नदाता अपमानित हो रहा है।”

उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की और चेतावनी दी कि यदि ऐसा अन्याय जारी रहा तो कांग्रेस पार्टी किसानों के समर्थन में आंदोलन करेगी।

सचिव के कारण उपजी यह स्थिति

हंगामे के बाद मंडी सचिव आर.पी. सिंह ने स्वीकार किया कि विवाद इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा की हरकतों के कारण उत्पन्न हुआ। उन्होंने कहा कि शिकायतें मिली हैं कि इंस्पेक्टर नशे में था और उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा: “राजकुमार शर्मा प्रभारी मार्केट इंस्पेक्टर हैं। हम मामले की जांच करेंगे और कार्रवाई करेंगे। हमारी कोशिश होगी कि मंडी की व्यवस्थाएं सुधारी जाएं ताकि किसानों को ऐसी परेशानी न हो।”

पंचनामा तैयार कर भेजी जा रही है

एक स्पॉट पंचनामा तैयार कर लिया गया है और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि विवादित इंस्पेक्टर को ड्यूटी से हटा दिया गया है और मामले में जांच शुरू कर दी गई है।

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