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बिजली बिल माफी योजना का लाभ देने से

योगी सरकार की बिजली बिल माफी योजना का लाभ देने से टोरेंट पॉवर का इनकार

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के बिजली उपभोक्‍ताओं के लिए बकाया बिजली बिल और उस पर लगने वाला मोटा ब्‍याज माफी की योजना शुरू की है।

योगी सरकार की बिजली बिल माफी योजना का लाभ देने से टोरेंट पॉवर का इनकार

योगी सरकार की बिजली बिल माफी योजना का लाभ देने से टोरेंट पॉवर का इनकार |

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के बिजली उपभोक्‍ताओं के लिए बकाया बिजली बिल और उस पर लगने वाला मोटा ब्‍याज माफी की योजना शुरू की है। इसमें पुराने बकाये बिलों पर लगने वाला पूरा ब्‍याज माफ करने का ऐलान किया गया है। साथ ही टोटल बिल पर भी 25% तक की छूट का प्रावधान किया गया है। राज्य में यह योजना एक दिसंबर से शुरू हो गयी है, लेकिन पावर कार्पोरेशन की आगरा की निजी क्षेत्र की फ्रेंचाइजी "टोरेंट पॉवर कंपनी" ने उपभोक्‍ताओं को यह लाभ देने से इनकार कर दिया है।

आगरा की फ्रेंचाइजी टोरेंट पॉवर कंपनी ने प्रदेश में एक दिसंबर से शुरू हुई बिजली बिल राहत योजना को लाग करने से इन्कार कर दिया है। उसने छूट के एवज में पॉवर कॉर्पोरेशन से रकम मांगी है। यह योजना सभी विद्युत वितरण निगमों के बिजली बिल बकायेदारों पर लागू है। आगरा में फ्रेंचाइजी कंपनी टोरेंट पावर कार्य कर रही है।

कंपनी ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से कहा है कि बिजली बिल राहत योजना के तहत उपभोक्ताओं को मिलने वाली 25 फीसदी छूट की राशि पॉवर कॉर्पोरेशन उसे उपलब्ध कराए। तब वह बिजली बिल राहत योजना लागू करेगी।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने इस पर मुख्यमंत्री से कंपनी का करार रद्द करने की मांग की है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। इसमें कंपनी के खिलाफ कार्रवाई और उसका फ्रेंचाइजी करार निरस्त करने की मांग की है। 

सीएम को लिखे पत्र में पदाधिकारियों ने कहा कि एक अप्रैल 2010 को जब आगरा की विद्युत वितरण व्यवस्था टोरेंट कंपनी को सौंपी गई थी, तब पॉवर कॉर्पोरेशन का उपभोक्ताओं पर 2200 करोड़ बकाया था। फ्रेंचाइजी करार के अनुसार यह रकम टोरेंट कंपनी को वसूल कर पॉवर कॉर्पोरेशन को लौटानी थी।

वसूली राशि पर पॉवर कॉर्पोरेशन की ओर से टोरेंट कंपनी को 10 फीसदी धनराशि इंसेंटिव के रूप में दी जानी थी, लेकिन करीब 16 साल बाद भी यह रकम कॉर्पोरेशन को नहीं मिली है। ऐसे में राज्य सरकार की योजना में सहभागी नहीं बनने पर कंपनी का करार रद्द होना चाहिए।

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