स्वास्थ्य विभाग ने औरंगाबाद जिले में 6 डॉक्टरों का तबादला कर दिया है। इससे सदर अस्पताल सहित कई स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी गहरा गई है।
औरंगाबाद (बिहार)। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में एक साथ 6 चिकित्सकों का तबादला कर दिया है। इससे सदर अस्पताल सहित कई पीएचसी-सीएचसी की व्यवस्था गड़बड़ाई है। सबसे ज्यादा असर सदर अस्पताल पर पड़ा है। यहां से दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएम शहजाद मकबूल का तबादला मधुबनी कर दिया गया है। उनके जाने के बाद दंत विभाग की ओपीडी लगभग बंद हो गई है।
डॉ. देवाश्री के तबादले से मायूसी
वहीं कई वर्षों से सदर में सेवा दे रहीं डॉ. देवाश्री सिंह को भी जम्होर पीएचसी भेजा गया है। उनके जाने से रोज आने वाले सैकड़ों मरीज मायूस हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि कोरोना काल में डॉ. देवाश्री सिंह को सदर अस्पताल के आईसीयू का प्रभार दिया गया था। उनके चिकित्सीय निगरानी में औरंगाबाद बिहार का ऐसा जिला बना जहां की मृत्यु दर सबसे कम यानी कि मात्र 0.06 प्रतिशत रही। उसके बाद से सदर अस्पताल में इनसे दिखाने के लिए मरीजों की भीड़ उमड़ने लगी। देवाश्री सिंह के स्थानांतरण से लोगों में मायूसी है।
दो नए डॉक्टरों की तैनाती
इसकी कमी पूर्ति करते हुए विभाग ने राहत के तौर पर डॉ. गौतम कुमार और डॉ. सुजीत मनोहर को सदर अस्पताल में पदस्थापित किया है। बताया जाता है कि डॉ. सुजीत मनोहर पूर्व में भी सदर अस्पताल में अपनी सेवा दे चुके है। लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी अब भी बनी हुई है। 6 महीने से हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद भी यहां खाली है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बरकरार
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के विभिन्न अस्पतालों से चिकित्सकों का तबादला तो कर दिया गया, लेकिन खाली पदों पर नई नियुक्ति नहीं हुई। इससे मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पताल या दूसरे जिले जाना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को कम से कम जिला मुख्यालय में चिकित्सकों की भरपूर व्यवस्था और बेहतर संसाधन रखनी चाहिए। तभी सरकार की नो रेफर की पॉलिसी धरातल पर दिखेगी।
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