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प्रदूषण नियंत्रण के लिए यूपी सरकार सख्त

यूपी में वायु प्रदूषण पर सख्ती, 15 नवंबर तक सड़क री-डेवलपमेंट और 30 नवंबर तक फ्यूल स्टेशनों पर कैमरे लगाने के निर्देश

यूपी के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सड़क री-डेवलपमेंट कार्य 15 नवंबर और सभी फ्यूल स्टेशनों पर ANPR कैमरे लगाने का काम 30 नवंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए।

यूपी में वायु प्रदूषण पर सख्ती 15 नवंबर तक सड़क री-डेवलपमेंट और 30 नवंबर तक फ्यूल स्टेशनों पर कैमरे लगाने के निर्देश

UP Sets Deadlines for Road Redevelopment and ANPR Cameras to Curb Pollution |

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर समीक्षा बैठक हुई। इसमें संबंधित जिलों और विभागों के अधिकारियों के साथ प्रदूषण नियंत्रण के लिए चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को प्रदूषण नियंत्रण के कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरा करने और निर्धारित एक्शन प्लान की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।

सड़क री-डेवलपमेंट का काम 15 नवंबर तक पूरा करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए लक्षित 1,002 किलोमीटर सड़क री-डेवलपमेंट कार्य की समीक्षा की। उन्होंने शेष कार्यों को नियमित निगरानी के साथ 15 नवंबर से पहले पूरा कराने के निर्देश दिए। साथ ही मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (MRSMs) का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने और उनकी कार्यशीलता की नियमित जांच करने को कहा। प्रमुख सड़कों की वार्डवार डीप क्लीनिंग, कूड़ा संवेदनशील स्थलों की सफाई और वहां दोबारा कचरा जमा होने से रोकने पर भी जोर दिया गया।

सभी फ्यूल स्टेशनों पर 30 नवंबर तक लगेंगे ANPR कैमरे

मुख्य सचिव ने सभी ईंधन स्टेशनों पर ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों की स्थापना का काम 30 नवंबर तक पूरा कराने को कहा गया। उन्होंने निर्धारित मानकों की अवधि पूरी कर चुके एंड-ऑफ-लाइफ (EOL) वाहनों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। इसके अलावा, प्री-BS-VI ट्रकों और बसों को BS-VI, CNG अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की प्रक्रिया तेज करने पर जोर दिया गया।

पराली जलाने पर रोक के लिए ड्रोन से निगरानी

मुख्य सचिव ने पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन सहित आधुनिक तकनीक के माध्यम से लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन-सीटू क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) मशीनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने और पराली की बेल्स के भंडारण का निर्धारित लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा करने पर जोर दिया। खुले में बायोमास और कचरा जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए संबंधित विभागों और अन्य हितधारकों को आवश्यक कार्रवाई करने तथा जागरूकता गतिविधियां चलाने के निर्देश भी दिए गए।

ट्रैफिक जाम और निर्माण स्थलों की धूल पर नियंत्रण

मुख्य सचिव ने एनसीआर में चिह्नित यातायात जाम वाले स्थानों पर अल्पकालिक कार्य तत्काल और दीर्घकालिक कार्य जल्द पूरा कराने को कहा। उन्होंने हॉटस्पॉट क्षेत्रों में वाहनों की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के एक्शन प्लान को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डस्ट पोर्टल पर अधिकाधिक परियोजनाओं को पंजीकृत करने और नियमित निगरानी करने को कहा गया। नियमों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

CRM मशीनों और कस्टम हायरिंग सेंटरों के लक्ष्य से अधिक उपलब्धि

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026 के निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले CRM मशीनों और कस्टम हायरिंग सेंटरों की संख्या में वृद्धि हुई है। CRM मशीनों का लक्ष्य 203 था, जबकि इनकी संख्या 218 हो गई है। इसी तरह कस्टम हायरिंग सेंटरों का लक्ष्य 41 था, जबकि इनकी संख्या बढ़कर 53 हो गई है। दोनों श्रेणियों में निर्धारित लक्ष्यों से अधिक उपलब्धि दर्ज की गई है।

पराली के वैकल्पिक उपयोग के लिए बढ़ीं इकाइयां

बैठक में पराली के एक्स-सीटू प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न इकाइयों की संख्या में हुई वृद्धि की जानकारी दी गई। पेलेट और ब्रिकेट निर्माण इकाइयों की संख्या 5 से बढ़कर 9 हो गई है। औद्योगिक बॉयलर और फर्नेस की संख्या 138 से बढ़कर 194 तथा कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांटों की संख्या 7 से बढ़कर 25 हो गई है। इन आंकड़ों को पराली प्रबंधन से संबंधित कार्यों की प्रगति के रूप में प्रस्तुत किया गया।

623 औद्योगिक इकाइयों में स्थापित हुआ ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम

औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी के संबंध में बैठक में बताया गया कि कुल 644 औद्योगिक इकाइयों में से 623 में ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन एंड एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) स्थापित कर उन्हें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के सर्वर से जोड़ दिया गया है। शेष 21 इकाइयों के खिलाफ क्लोजर डायरेक्शन जारी किए गए हैं। इस दौरान औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण निगरानी व्यवस्था की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में लीगेसी वेस्ट का निस्तारण पूरा

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि प्रतिदिन 3,783 टन ताजा ठोस कचरा उत्पादन के मुकाबले 4,682 टन प्रतिदिन की प्रसंस्करण क्षमता उपलब्ध है। गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में पुराने जमा कचरे (लीगेसी वेस्ट) के निस्तारण का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं, नोएडा में लीगेसी वेस्ट शेष नहीं है। निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए डस्ट ऐप पोर्टल भी क्रियाशील है, जिस पर परियोजनाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया जारी है। वर्तमान में 41 स्थल सक्रिय हैं और इनमें 38 कैमरे लाइव हैं।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया हिस्सा

समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव परिवहन अमृत अभिजात, प्रमुख सचिव वन एम.पी. अग्रवाल, सचिव नगर विकास अनुज कुमार झा और परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एनसीआर क्षेत्र के संबंधित जिलाधिकारियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।

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