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सड़क के अभाव में महिला की मौत

रीवा में सड़क न होने से खाट पर अस्पताल ले जाई गई महिला की रास्ते में मौत

रीवा में आकाशीय बिजली से घायल महिला की अस्पताल ले जाने के क्रम में मौत हो गई।

रीवा में सड़क न होने से खाट पर अस्पताल ले जाई गई महिला की रास्ते में मौत

Woman dies on way to hospital in Rewa after being carried on a cot due to lack of road |

रीवा,(मध्य प्रदेश)। एक तरफ जहां देश डिजिटल क्रांति और चमचमाती फोर-लेन सड़कों का जश्न मना रहा है, वहीं विंध्य की धरती से आई एक तस्वीर ने विकास के तमाम दावों की कलई खोलकर रख दी है।

महिला ने रास्ते में ही तोड़ा दम

मामला रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत नदना डिहिया का है, जहां महज दो किलोमीटर पक्की सड़क न होने के कारण एक आदिवासी महिला को समय पर इलाज नहीं मिल सका और उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। तड़पती महिला को खाट पर लादकर कीचड़ से भरे रास्ते से ले जाते ग्रामीणों का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है, जो व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है।

आकाशीय बिजली की शिकार हुई महिला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार देर शाम ग्राम पंचायत नदना डिहिया निवासी रामकली रावत पत्नी स्वर्गीय राम स्वयंवर रावत पर अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। हादसे के बाद महिला गंभीर रूप से झुलस गई थी, लेकिन उसकी सांसें चल रही थीं। परिजनों ने तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन गांव की बदहाल स्थिति ने उनके हौसले तोड़ दिए। गांव तक एम्बुलेंस आना तो दूर, पैदल चलना भी दूभर था।

महिला को  खाट पर ले जाया गया अस्पताल

थक-हारकर परिजनों और ग्रामीणों ने महिला को एक खाट पर लिटाया और अपने कंधों पर उठाकर करीब दो किलोमीटर लंबे कच्चे और कीचड़ वाले रास्ते को पार करने निकल पड़े। दलदल को पार करने में कीमती समय बर्बाद हो गया और जब तक महिला को मुख्य मार्ग से अस्पताल पहुंचाया जाता, तब तक देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

बड़ा सवाल: विधायक निधि के 5 लाख रुपए कहां गए

इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश है। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है, कि इस सड़क के निर्माण के लिए पूर्व में विधायक निधि से ₹5 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद आज तक जमीन पर एक गिट्टी भी नहीं डाली गई। ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि यदि बजट स्वीकृत हुआ था, तो वह राशि किसकी जेब में गई? क्या कागजों पर सड़क बनाकर पूरी राशि का बंदरबांट कर लिया गया

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