मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गो संरक्षण अभियान को अब आईआईटी दिल्ली की तकनीक का साथ मिलने जा रहा है।
लखनऊ {उत्तर प्रदेश}: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गो संरक्षण अभियान को अब आईआईटी दिल्ली की तकनीक का साथ मिलने जा रहा है। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर और विशेषज्ञों की टीम उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बायोगैस संयंत्र स्थापित करने में तकनीकी सहयोग करेगी। इसके तहत प्रदेश के हर जिले में एक मॉडल विलेज विकसित करने की योजना है। गो सेवा और बायोगैस के जरिए गांवों को आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
झांसी के पलींदा गांव से हुई शुरुआत
मुख्यमंत्री के निर्देश पर झांसी के ग्राम पलींदा में 18 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए गए हैं। इस पूरे गांव को प्राकृतिक कृषि ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार की योजना है कि इसी मॉडल को प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाए।
IIT दिल्ली की टीम करेगी तकनीकी सहयोग
आईआईटी दिल्ली के बायोगैस डेवलपमेंट ट्रेनिंग सेंटर के प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार विजय के नेतृत्व में विशेषज्ञों और छात्रों की टीम इस अभियान को आगे बढ़ा रही है। टीम में रत्नेश तिवारी, अक्षय श्रीवास्तव, चिंतन दवे और डॉ. मंगाराम शामिल हैं। यह टीम गांवों में बायोगैस प्लांट लगाने, उनके रखरखाव और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का काम करेगी।
हर घर तक पहुंचेगी बायोगैस
झांसी के ग्राम पलींदा में पहले चरण में 18 बायोगैस प्लांट लगाए गए हैं। योजना है कि गांव के प्रत्येक घर तक बायोगैस की सुविधा पहुंचे, जिससे खाना पकाने के लिए स्वच्छ और सस्ता ईंधन उपलब्ध हो सके तथा पूरा गांव प्राकृतिक कृषि ग्राम के रूप में विकसित हो। गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि बायोगैस संयंत्रों से रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद मिलेगी, जिससे रसायन मुक्त कृषि को बढ़ावा मिलेगा और बाजार में ऑर्गेनिक खाद्य उत्पादों की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
उन्होंने कहा कि प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार विजय के नेतृत्व में आईआईटी दिल्ली की टीम इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की दिशा में काम कर रही है। यह पहल ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ स्वच्छ गांव, स्वस्थ किसान और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश का नया मॉडल तैयार करेगी। गो सेवा आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि योगी सरकार का यह अभियान केवल गो संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की भी पहल है। जल्द ही इस योजना को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाने की तैयारी है, ताकि गांव-गांव में बायोगैस और प्राकृतिक कृषि का मॉडल विकसित किया जा सके।
यह भी पढ़े: उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं को दक्ष बनाएगी योगी सरकार, ITI और कौशल विकास केंद्रों की होगी नियमित मॉनिटरिंग