शाजापुर जिले में रविवार और सोमवार को हुई झमाझम बारिश से क्षेत्रभर की नदी-नाले उफान पर आ गए। गांव पथरिया के किनारे से निकला नाला भी तेज बहाव के कारण खतरनाक हो गया।
शाजापुर {मध्य प्रदेश}: जिले में रविवार और सोमवार को हुई झमाझम बारिश से क्षेत्रभर की नदी-नाले उफान पर आ गए। गांव पथरिया के किनारे से निकला नाला भी तेज बहाव के कारण खतरनाक हो गया। इसी दौरान एक युवक दूध लेकर नाला पार करते समय तेज पानी के बहाव में बहने लगा। युवक के चीखने की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने तुरंत नाले में छलांग लगा दी और घेराबंदी कर उसकी जान बचा ली।
दूध लेकर लौटते समय बहा युवक
गुलाना तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव मुरादपुर पथरिया में सोमवार को ग्रामीणों की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया। गांव के लाखन सिंह गुर्जर का पुत्र हरिओम नाला पार कर दूसरी तरफ जंगल में बने मकान पर पहुंचा था। वहां से दूध लेकर जब वह वापस गांव की ओर लौटने लगा, तभी बारिश के कारण नाले का पानी अचानक तेज हो गया। हरिओम का संतुलन बिगड़ गया और वह तेज बहाव की चपेट में आकर नाले में गिर गया। बहते हुए उसने घबराकर जोर-जोर से मदद के लिए आवाज लगाई।
ग्रामीणों ने नाले में लगाई छलांग
हरिओम की आवाज सुनते ही दूसरे किनारे पर मौजूद कुछ ग्रामीणों ने बिना देर किए नाले में छलांग लगा दी। ग्रामीणों ने आसपास से घेराबंदी कर काफी मशक्कत के बाद डूबते हुए हरिओम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ग्रामीणों ने बताया कि हरिओम को तैरना भी नहीं आता है। ऐसे में अगर ग्रामीण समय रहते उसकी मदद के लिए नहीं पहुंचते तो बड़ा हादसा हो सकता था।
बेटे को सुरक्षित देख भावुक हुए माता-पिता
घटना की जानकारी मिलते ही हरिओम के परिजनों के होश उड़ गए। हालांकि, बेटे को सुरक्षित देखकर माता-पिता भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि बारिश शुरू होते ही यह नाला ग्रामीणों के लिए खतरा बन जाता है।
नाले के एक तरफ गांव, दूसरी ओर ग्रामीणों की जमीन
गुलाना तहसील की ग्राम पंचायत बांगली के अंतर्गत आने वाले मुरादपुर पथरिया गांव के लोगों के लिए बारिश के मौसम में नाला बड़ी परेशानी बन जाता है। नाले के एक किनारे गांव बसा हुआ है, जबकि दूसरी तरफ ग्रामीणों की जमीन है। करीब 200 परिवारों वाले इस गांव की आबादी लगभग 1200 है और करीब 900 मतदाता हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, 80 प्रतिशत से अधिक जमीन नाले के दूसरी तरफ है।
चारा लाने के लिए जान जोखिम में डालते हैं ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के चार-पांच परिवार नाले के उस पार जंगल में ही मकान बनाकर रहते हैं। बारिश के दौरान मवेशियों के लिए चारा और अन्य जरूरी सामान लाने के लिए ग्रामीणों को तेज बहाव वाले नाले को पार करना पड़ता है। ऐसे में हर बारिश के मौसम में ग्रामीणों की जान जोखिम में पड़ जाती है। ग्रामीणों की मांग है कि नाले पर सुरक्षित रास्ते या पुलिया की व्यवस्था की जाए, ताकि बारिश के दौरान किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।
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