प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

बलूचिस्तान में पांच शव मिलने से बढ़ा तनाव

बलूचिस्तान के जीवानी में 5 शव मिलने से बवाल, जबरन गुमशुदगी और फर्जी मुठभेड़ के आरोपों से घिरी पाक सेना

बलूचिस्तान के जीवानी इलाके से पांच बलूच नागरिकों के शव बरामद होने के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

बलूचिस्तान के जीवानी में 5 शव मिलने से बवाल जबरन गुमशुदगी और फर्जी मुठभेड़ के आरोपों से घिरी पाक सेना

Tensions Soar in Balochistan After Five Bodies Recovered in Jiwani |

बलूचिस्तान (पाकिस्तान)। बलूचिस्तान के जीवानी इलाके से पांच बलूच नागरिकों के शव बरामद होने के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन, जबरन गुमशुदगी (Enforced Disappearances) और गैर-न्यायिक हत्याओं (Extrajudicial Killings) के गंभीर कूटनीतिक और क्षेत्रीय विवादों को हवा दे दी है। बलूच अधिकार संगठनों और पीड़ित परिवारों का दावा है कि मारे गए लोगों में से कम से कम चार पिछले कई महीनों से लापता थे, जिन्हें सुरक्षा एजेंसियों ने हिरासत में रखा हुआ था।

पाकिस्तानी सेना का दावा: एनकाउंटर में मारे गए BLA उग्रवादी

'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, ये शव जीवानी के पनवान और गंज इलाकों से बरामद किए गए हैं। पाकिस्तान सैन्य बलों का कहना है कि ये सभी मृतक सशस्त्र उग्रवादी थे, जो एक सुरक्षा अभियान के दौरान मारे गए। सेना के मुताबिक, यह ऑपरेशन पनवान में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड के कैंप पर बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) की मजीद ब्रिगेड द्वारा किए गए एक Vehicle-borne Attack के बाद शुरू किया गया था।

मारे गए लोग पहले से थे सुरक्षा बलों की अवैध हिरासत में

हालांकि, सेना के इस आधिकारिक बयान को बलूच यकजेहती कमेटी (BYC), वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (VBMP), स्थानीय कार्यकर्ताओं और पीड़ितों के परिवारों ने सिरे से खारिज कर दिया है। इन संगठनों का कहना है कि मारे गए पुरुषों का 'जबरन गुमशुदगी' का पुराना रिकॉर्ड रहा है और उन्हें पहले से ही अवैध हिरासत में रखा गया था। मारे गए पांच लोगों में से चार की पहचान कर ली गई है, जबकि पांचवें शव की शिनाख्त अभी नहीं हो सकी है। पहचान किए गए पीड़ितों के नाम इस प्रकार हैं:

  • अब्दुल हक: ग्वादर में 'मेमार-ए-नौ एकेडमी' के प्रिंसिपल, जो फरवरी से लापता थे।
  • पीरी (पुत्र अस्सा): रोबार इलाके से 7 जनवरी को घर से उठाए गए थे।
  • शाह बख्श (पुत्र उमर): पीरी के साथ ही 7 जनवरी को रोबार से लापता किए गए थे।
  • हैदर अली मोहम्मद: जिनके परिवार ने अगस्त 2025 में ग्वादर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर उनकी रिहाई के लिए धरना प्रदर्शन किया था।

विशेष रूप से, प्रिंसिपल अब्दुल हक के भाई मोहम्मद रमजान बलूच भी 2009 से लापता हैं। अब्दुल हक वर्षों से अपने भाई के परिवार की देखभाल कर रहे थे और उनके लिए न्याय की मांग कर रहे थे।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की तीखी प्रतिक्रिया

वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (VBMP) ने अब्दुल हक की कथित गैर-न्यायिक हत्या की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। वहीं, BYC की वरिष्ठ नेता सम्मी दीन बलूच ने कहा कि यह घटना बलूचिस्तान में चल रहे एक खतरनाक पैटर्न को दर्शाती है, जिसके तहत पहले बलूच नागरिकों को जबरन गायब किया जाता है और बाद में उनके क्षत-विक्षत शव फेंक दिए जाते हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा

बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) के चेयरमैन डॉ. नसीम बलूच ने अब्दुल हक को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने बच्चों को शिक्षित करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। इसके साथ ही, अधिकार कार्यकर्ता सबीहा बलूच ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे परिवार को अब्दुल हक की जल्द रिहाई का झूठा आश्वासन देकर लगातार गुमराह कर रहे थे।
(यह खबर ANI से सीधे संपादित की गई है।)

यह भी पढ़ें: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर दी श्रद्धांजलि

Related to this topic: