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ट्रंप के बयान के बाद बाजार में मची भारी बिकवाली

डोनाल्ड ट्रंप के बयान से शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 1600 अंक टूटा, क्रूड ऑयल में भारी उछाल

NATO शिखर सम्मेलन में ट्रंप द्वारा ईरान पर अमेरिकी हमले की पुष्टि करने और वैश्विक व्यापार को लेकर दी गई चेतावनियों के बाद आखिरी एक घंटे में घरेलू बाजारों में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली।

डोनाल्ड ट्रंप के बयान से शेयर बाजार में हाहाकार सेंसेक्स 1600 अंक टूटा क्रूड ऑयल में भारी उछाल

Trump's Iran Remarks Trigger Massive Indian Market Selloff |

मुंबई (महाराष्ट्र)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कड़े बयान ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में सुनामी ला दी। नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन में ट्रंप द्वारा ईरान पर अमेरिकी हमले की पुष्टि करने और वैश्विक व्यापार को लेकर दी गई चेतावनियों के बाद आखिरी एक घंटे में घरेलू बाजारों में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) अचानक बढ़ने से वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की होड़ मच गई, जिसका सीधा और भारी असर भारतीय इक्विटी मार्केट पर पड़ा।

सेंसेक्स-निफ्टी में रिकॉर्ड गिरावट, निवेशकों को बड़ा झटका

बाजार में मचे इस हाहाकार के बीच बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 (Nifty 50) 500 अंक से अधिक यानी 2 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 23,887.45 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स (Sensex) 1,600 से ज्यादा अंकों की भारी गिरावट के साथ करीब 2 प्रतिशत फिसलकर 76,555 के स्तर पर आकर रुका।

बैंकिंग शेयरों पर सबसे ज्यादा असर

इस गिरावट की आंच सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार (Broader Markets) में भी भारी बिकवाली देखी गई। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले सेक्टर्स में शामिल रहे। इस अचानक आई गिरावट के कारण बाजार में अनिश्चितता का पैमाना माना जाने वाला इंडिया विक्स (India VIX) 28 प्रतिशत से अधिक उछल गया, जो बाजार में आई इस तीव्र अस्थिरता को साफ दर्शाता है।

ट्रंप के बयान ने ऐसे भड़काई वैश्विक बाजारों में आग

अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने देखते ही देखते पश्चिम एशिया में एक नए तनाव की आशंका को हवा दे दी। ट्रंप ने शिखर सम्मेलन में कहा, "हमने कल रात ईरान के खिलाफ बहुत शक्तिशाली हमला किया। ईरान ने जहाजों पर रॉकेट दागे थे, इसीलिए अमेरिका ने यह जवाबी कार्रवाई की।"

ईरान पर ट्रंप का तीखा हमला, बढ़ी युद्ध की आशंका

डोनाल्ड ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने ईरान के नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए आगे कहा, "ईरान को नहीं पता कि वह क्या कर रहा है, वे अक्षम हैं।" उन्होंने तंज कसते हुए यह भी जोड़ दिया, "हमने ईरान के साथ बहुत समय बर्बाद किया।" ट्रंप के इस बयान के बाद दुनिया भर के बाजारों में यह डर बैठ गया कि पश्चिम एशिया में चल रहा विवाद अब और गंभीर मोड़ ले सकता है।

स्पेन और नाटो पर भी ट्रंप के विवादित बयान

ईरान के अलावा ट्रंप ने वैश्विक व्यापार और रक्षा संगठन नाटो को लेकर भी कई विवादित टिप्पणियां कीं। ट्रंप ने कहा, "ग्रीनलैंड को लेकर मैं नाटो से खुश नहीं हूं।" इसके बाद उन्होंने स्पेन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "स्पेन एक बेकार की वजह (Wasted Cause) है, मैं उसके साथ व्यापार नहीं करना चाहता।" ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह "स्पेन के साथ सभी व्यापार बंद करना" चाहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया, "ग्रीनलैंड एक बड़ी समस्या है" और "हम नाटो में बहुत अधिक भुगतान करते हैं।"

कच्चे तेल में उबाल, भारत पर दोहरी मार की आशंका

बाजार के जानकारों का कहना है कि ट्रंप की इन टिप्पणियों ने एक लंबे भू-राजनीतिक संघर्ष की चिंताओं को फिर से जिंदा कर दिया है। इस बयानबाजी के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें करीब 4 प्रतिशत उछलकर 76.71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं, जिसने घरेलू निवेशकों के सेंटिमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया।

अमेरिका-ईरान समझौते के टूटने से वैश्विक बाजारों में बढ़ा जोखिम

मार्केट और बैंकिंग एक्सपर्ट अजय बग्गा ने इस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करते हुए कहा, "अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के अचानक टूटने से वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम से बचने की एक तीव्र लहर चल पड़ी है। इसका खामियाजा भारतीय इक्विटी बाजार को सबसे ज्यादा भुगतना पड़ा है।"

'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' संकट से भारत पर आयातित महंगाई का खतरा

बग्गा ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप की यह घोषणा कि शांति प्रक्रिया अब 'खत्म' हो चुकी है, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) ट्रांजिट कॉरिडोर में गंभीर भू-राजनीतिक अनिश्चितता पैदा करती है। आपूर्ति और सुरक्षा की नई चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। भारत, जो कि अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, उसे अब आयातित महंगाई (Imported Inflation) और राजकोषीय दबाव (Fiscal Pressure) की दोहरी मार का सामना करना पड़ेगा।"

भू-राजनीतिक तनाव बढ़ाएंगे बाजार की अस्थिरता

अजय बग्गा ने आगे कहा कि जब तक तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण बाजार में यह उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका है। इस बड़ी हलचल के बीच खबर लिखे जाने तक डॉलर इंडेक्स 0.10 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 101.1300 पर पहुंच गया था, जबकि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.62 प्रतिशत मजबूत होकर 95.5600 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
(यह खबर ANI से सीधे संपादित की गई है।)

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