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रेल ट्रैक पर हाथियों की सुरक्षा को एआई

रेल ट्रैक पर हाथियों व वन्यजीवों को दुर्घटनाओं से बचाने को एआई का होगा इस्तेमाल

उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के तराई जिलों लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और काशीपुर में रेल ट्रैक पर हाथियों व अन्य वन्यजीवों की दुर्घटनाएं रोकने के लिए एआई तकनीक लागू की जाएगी।

रेल ट्रैक पर हाथियों व वन्यजीवों को दुर्घटनाओं से बचाने को  एआई का होगा इस्तेमाल

Wild life Protection |

इज्जतनगर मंडल की नई योजना

पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल प्रशासन ने इन संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाले रेल मार्गों पर “एआई इनेबल्ड इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम” लगाने की योजना बनाई है। यह सिस्टम वन्यजीवों के ट्रैक के आसपास आते ही तत्काल अलर्ट जारी करेगा, जिससे समय रहते ट्रेनों की गति नियंत्रित कर हादसों को रोका जा सकेगा।

नेशनल पार्क से गुजरती रेलवे लाइन

विश्व प्रसिद्ध कार्बेट नेशनल पार्क और दुधवा नेशनल पार्क उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों में स्थित हैं। इन पार्कों के बड़े हिस्सों से रेलवे लाइन गुजरती है, जहां हाथियों और अन्य वन्यजीवों के ट्रैक पर आने की घटनाएं अक्सर सामने आती रही हैं।

99.18 किमी रूट पर लगेगा सिस्टम

इज्जतनगर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले कुल 99.18 किलोमीटर लंबे रूट पर इस एआई आधारित सिस्टम को लगाने की योजना है। पहले चरण में लालकुआं-गुलरभोज (15.8 किमी), छतरपुर-हल्दी रोड (12 किमी), हल्दी रोड-लालकुआं (2.7 किमी), पंतनगर-लालकुआं (1.2 किमी) और लालकुआं-हल्द्वानी (3.2 किमी) खंड शामिल किए गए हैं।

अन्य खंडों पर भी तैयारी

इसके अलावा काशीपुर-रामनगर और खटीमा-बनबसा रेल खंड पर भी इस सिस्टम को लगाने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि पूरे संवेदनशील क्षेत्र को कवर किया जा सके।

रेलवे और वन विभाग की संयुक्त पहल

हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रेलवे और वन विभाग मिलकर कई उपाय कर रहे हैं। इनमें ट्रेनों की स्पीड लिमिट तय करना, चेतावनी साइन बोर्ड लगाना, अंडरपास, बाड़, हनी बी बजर डिवाइस और थर्मल कैमरे लगाना शामिल है। साथ ही एलिफेंट कॉरिडोर भी विकसित किया गया है।

डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसर की भूमिका

रेल विभाग के सूत्रों के अनुसार, यह सिस्टम “डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसर” (डीएएस) तकनीक पर आधारित है। इसे रेल ट्रैक से करीब 20 मीटर दूर और जमीन से तीन फीट नीचे बिछाया जाता है।

रीयल टाइम अलर्ट की सुविधा

ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से हाथियों की चाल और आवाज से पैदा होने वाले कंपन को पहचानकर यह सिस्टम लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को रीयल टाइम अलर्ट भेजता है। इससे समय रहते ट्रेन की गति कम कर वन्यजीवों की जान बचाई जा सकेगी।

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