केन्द्र सरकार द्वारा हाल में जीएसटी दरों में राहत और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ने से दोपहिया, पैसेंजर और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है।
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा हाल में जीएसटी दरों में राहत और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ने से दोपहिया, पैसेंजर और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। यही नहीं, ग्रामीण आय में मजबूती और अच्छी फसलों से ट्रैक्टर और शुरुआती स्तर के वाहनों की मांग बढ़ी है। "फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म पीएल कैपिटल" ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अफोर्डेबिलिटी में सुधार, आसान फाइनेंसिंग विकल्पों और ग्राहकों के बेहतर सेंटीमेंट के चलते पैसेंजर वाहन, दोपहिया और वाणिज्यिक वाहनों की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में वॉल्यूम के लिहाज से हुई 20% से अधिक की ग्रोथ
भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में वॉल्यूम के लिहाज से लगभग 20% से अधिक की उल्लेखनीय ग्रोथ दर्ज की है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश में यात्री वाहनों की थोक बिक्री 2025 में 44.89 लाख से अधिक के सार्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। यह आंकड़ा 2024 में बिके 42,74,793 यात्री वाहनों की तुलना में पांच फीसदी अधिक है।
यूटिलिटी वाहनों की बिक्री में भी दिखी बढ़ोतरी
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने डाटा जारी करते हुए बताया कि यूटिलिटी वाहनों की बिक्री 29,54,279 इकाई पहुंच गई। एक साल पहले यह आंकड़ा 27,49,932 इकाई था। हालांकि, यात्री कारों की बिक्री में सालाना आधार पर मामूली 0.6 फीसदी की तेजी रही और कुल 13,79,884 कारें ही विकीं। वैन की विक्री 2024 के मुकाबले 1.1 फीसदी बढ़कर 1,55,554 इकाई पहुंच गई।
दिसंबर में 38 पर पहुंची पैसेंजर वाहनों की इन्वेंट्री
तीसरी तिमाही में बिक्री में मजबूत उछाल के कारण पैसेंजर वाहनों की इन्वेंट्री नवंबर में घटकर 45 दिन और दिसंबर में और कम होकर 38 दिन पर आ गई, जबकि पहले यह 55 दिन के स्तर पर थी। रिपोर्ट में बताया गया कि जीएसटी दरों में कटौती के बाद छोटी कारों को सबसे अधिक लाभ मिला है। हालांकि, एसयूवी की बिक्री लगातार मजबूत बनी हुई है और इस सेगमेंट में मांग में कोई कमी नहीं देखी गई।
दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी दिखी तेज बढ़त
दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी तेज बढ़त दर्ज की गई है। खासकर 150 सीसी और उससे ऊपर के सेगमेंट में मजबूत मांग के चलते कुछ मॉडलों में वेटिंग पीरिएड बढ़ गया है। दोपहिया वाहनों की बिक्री 2025 में करीब पांच फीसदी बढ़कर 2.05 करोड़ पहुंच गई। साल 2024 में 1,95,43,093 दोपहिया वाहन बिके थे। स्कूटर की बिक्री में सर्वाधिक 12.7 फीसदी की तेजी रही और कुल 75,23,678 इकाई बिके। मोटरसाइकिल की बिक्री 1.1 फीसदी बढ़कर 1,24,82,990 इकाई रही। मोपेड की बिक्री 4.1 फीसदी की गिरावट के साथ 4,93,971 इकाई रह गई।
सालाना आधार पर 8 फीसदी बढ़ा वाणिज्यिक वाहनों का बिक्री
बीते साल तिपहिया और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री भी अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। 2025 में कुल 7,88,429 तिपहिया वाहन बिके। यह आंकड़ा 2024 में बिके 7,28,670 इकाइयों से 8 फीसदी अधिक है। वाणिज्यिक वाहनों सेगमेंट में बिक्री भी सालाना आधार पर 8 फीसदी बढ़कर 10,27,877 इकाई पहुंच गई। 2024 में यह आंकड़ा 9,54,051 इकाई था। वाणिज्यिक वाहनों की वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में तेजी के शुरुआती संकेत देखने को मिले। मानसून के लंबे मौसम के बाद निर्माण और खनन गतिविधियों में आई तेजी से इस सेगमेंट को समर्थन मिला।
2025 में सालाना आधार पर 26.8 फीसदी बढ़ी यात्री वाहनों की थोक बिक्री
सियाम के मुताबिक, दिसंबर, 2025 में यात्री वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 26.8 फीसदी बढ़कर 3,99,216 इकाई पहुंच गई। यह बीते साल में सर्वाधिक मासिक बिक्री है। 2024 में 3,14,934 यात्री वाहन बिके थे। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में खरीफ की अच्छी फसल और रबी की बेहतर बुआई से किसानों की आय और नकदी प्रवाह मजबूत हुआ है। इसके परिणामस्वरूप शुरुआती स्तर के वाहनों और ट्रैक्टरों की मांग में वृद्धि हुई है।
वाहन निर्यात के मामले में उद्योग के लिए अच्छा रहा 2025
सियाम ने कहा, घरेलू बिक्री के साथ वाहन निर्यात के मामले में भी 2025 उद्योग के लिए अच्छा रहा। 2024 की तुलना में बीते साल देश से सभी श्रेणी के वाहनों के निर्यात में दहाई अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। सियाम अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने बताया कि वाहन उद्योग के लिए 2025 एक ऐतिहासिक वर्ष रहा। साल की शुरुआत धीमी रही और उद्योग आपूर्ति पक्ष की चुनौतियों से जूझता रहा। आयकर राहत, रेपो दर में लगातार कटौती और जीएसटी 2.0 के लागू होने सहित कई संरचनात्मक नीतिगत सुधारों ने सकारात्मक मांग के माहौल की नींव रखी। जीएसटी दरों में कटौती से वाहन सस्ते हुए और इस उद्योग को नई रफ्तार मिली।
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