एक निदेशक के आवासीय परिसर में की गई तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, अचल संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य सामग्री भी जब्त की गई हैं।
नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को बताया कि उसने रिलायंस अनिल अंबानी समूह के चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संदिग्ध लेनदेन और समूह के स्वामित्व वाली या उसके नियंत्रण वाली संपत्तियों से संबंधित साक्ष्य जब्त किए हैं। 7 जुलाई को ई-कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड के परिसर और उसके एक निदेशक के आवासीय परिसर में की गई तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, अचल संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य सामग्री भी जब्त की गई हैं।
बैंकों की एफआईआर पर हुई कार्रवाई
ईडी की यह नई कार्रवाई रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक धन के गबन और हेराफेरी से संबंधित मामलों की चल रही जांच के सिलसिले में है। ईडी ने दिल्ली स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा यस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक लिमिटेड की शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इससे पहले, ईडी ने इस मामले में 12 जून को एक विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोग दायर किया था। एक बयान में, ईडी ने कहा कि अब तक की गई उसकी जांच से पता चला है कि आरएचएफएल और आरसीएफएल द्वारा जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन को रिलायंस अनिल अंबानी समूह द्वारा नियंत्रित और प्रबंधित फर्जी और समूह कंपनियों के जाल के माध्यम से व्यवस्थित रूप से हेराफेरी किया गया था। (एएनआई)
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