इजराइल - ईरान युद्ध और ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की शहादत के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद कर दिया गया है। इस वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति पर बुरा असर पड़ रहा है।
नई दिल्ली। इजराइल - ईरान युद्ध और ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की शहादत के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद कर दिया गया है। इस वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति पर बुरा असर पड़ रहा है जिससे कीमतों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि ईरान संकट के बीच भारत में तत्काल पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर कोई गंभीर संकट नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत के पास लगभग 40-45 दिन की जरूरत पूरी करने लायक कच्चे तेल का भंडार मौजूद है।
जलडमरूमध्य बंद होने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल
अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल मानक ब्रेंट क्रूड मंगलवार को 6.05 डॉलर या 7.8 फीसदी बढ़कर 84 डॉलर के करीब 83.79 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। एक समय यह 19 महीने के उच्च स्तर 85.12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। यह ब्रेंट का जुलाई, 2024 के बाद का उच्चतम स्तर है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अमेरिकी मानक यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की कीमतें 5.31 डॉलर या 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 76.54 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। कारोबार के दौरान एक समय डब्ल्यूटीआई क्रूड 77.53 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था, जो जून, 2025 के बाद इसका उच्च स्तर है।
दुनिया के 20% तेल प्रवाह पर संकट और ईरान की कड़ी चेतावनी
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ कच्चे तेल और लिक्विड नेचुरल गैस का ऐसा रूट है, जो दुनिया के एनर्जी सेक्टर को हिलाने का दम रखता है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज या बोट यहां से गुजरी, तो उसे जला दिया जाएगा। ईरान के इस कदम से वैश्विक तेल प्रवाह का लगभग 20% हिस्सा प्रभावित होगा और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। भारत प्रतिदिन औसतन करीब 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 25 लाख बैरल तेल प्रतिदिन होर्मुज मार्ग से आता है।
10 करोड़ बैरल का स्टॉक और 45 दिन की ज़रुरत का सुरक्षित भंडार
ईरान - इजराइल संघर्ष के बावजूद भारत में अभी तत्काल पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर गंभीर संकट नहीं है। जल डमरूमध्य के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत के पास लगभग 40-45 दिन की जरूरत पूरी करने लायक कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। ऊर्जा बाजार विश्लेषण फर्म केप्लर ने यह आकलन जारी किया है। भारत के पास करीब 10 करोड़ बैरल वाणिज्यिक कच्चे तेल का स्टॉक है। इसमें रिफाइनरियों के पास मौजूद स्टॉक, भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) और देश की ओर आ रहे जहाजों पर लदा तेल शामिल है।
रूस और पश्चिम अफ्रीका से तेल आयात बढ़ाकर कमी पूरी करने की योजना
विश्लेषकों का कहना है कि भारत पश्चिम अफ्रीका, लातिनी अमेरिका, अमेरिका और रूस से अतिरिक्त आपूर्ति लेकर इस कमी की भरपाई कर सकता है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर रूसी तेल की और भी रुख किया जा सकता है। आईएनजी के विश्लेषक ने एक नोट में कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। बाजार के लिए एक बड़ा जोखिम यह होगा कि ईरान इस इलाके में और ऊर्जा बुनियादी ढांचों को निशाना बना रहा है। इससे कच्चे तेल की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित हो सकती है।
2026 तक कच्चे तेल के 150 डॉलर प्रति बैरल पहुँचने का डर
उधर, बर्नस्टीन ने एक रिपोर्ट में कहा, मौजूदा संघर्ष लंबे समय पर जारी रहा तो 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 120-150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच सकती हैं। डाटा विश्लेषक कंपनी केप्लर का कहना है कि उपग्रह नेविगेशन प्रणालियों में व्यवधान के कारण टैंकर की आवाजाही में भारी कमी आई है।
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