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प्रेडेटरी प्राइसिंग के खिलाफ भारत की आईसीटी नीति

भारत आईसीटी नीति से कर रहा अपने हितों की रक्षा, प्रेडेटरी प्राइसिंग के खिलाफ रुख सख्त: पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) उत्पादों को लेकर भारत की नीति उन देशों से राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर केंद्रित है।

भारत आईसीटी नीति से कर रहा अपने हितों की रक्षा प्रेडेटरी प्राइसिंग के खिलाफ रुख सख्त पीयूष गोयल

ICT Trade Policy Protects India’s Interests: Piyush Goyal |

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) उत्पादों को लेकर भारत की नीति उन देशों से राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर केंद्रित है, जो प्रेडेटरी प्राइसिंग और अनुचित व्यापार प्रथाओं में शामिल रहते हैं।

भारत का उद्देश्य अपने हितों की रक्षा करना है

भारत-अमेरिका संयुक्त बयान पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, जिसमें हाल ही में घोषित व्यापार समझौते का ब्योरा दिया गया है और जिसके तहत अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर लगने वाला टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा, मंत्री गोयल ने कहा कि भारत का उद्देश्य वैश्विक कंपनियों को बाहर करना नहीं है, बल्कि उन देशों से अपने हितों की रक्षा करना है जो अनुचित तरीके से कम कीमतों पर सामान बेचते हैं। लक्ष्य निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करना है।

स्मार्टफोन निर्यात पर शून्य शुल्क

उन्होंने कहा, "भारत का रुख उन देशों से अपने हितों की रक्षा करने पर ज्यादा केंद्रित है, जो प्रेडेटरी प्राइसिंग करते हैं या ऐसे अव्यावहारिक दामों पर सामान सप्लाई करते हैं, जो कभी-कभी भारत में निर्माण लागत से भी कम होते हैं।" इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और उनके कलपुर्जों के निर्यात की स्थिति पर बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा, "व्यापार व्यवस्था के तहत अमेरिका को स्मार्टफोन का निर्यात शून्य शुल्क पर किया जाएगा।"

भारत-अमेरिका एक-दूसरे के पूरक

गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे के पूरक हैं, क्योंकि दोनों की अर्थव्यवस्थाएं और ताकतें अलग-अलग हैं। यह समझौता आपसी लाभ पर आधारित साझेदारी को दर्शाता है, जो भारत की जरूरतों को पूरा करता है और विकास को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा, "ऐसे देश जो निष्पक्ष खेल में विश्वास रखते हैं, जैसे अमेरिका, जहां श्रम लागत भारत की तुलना में लगभग 50 गुना अधिक है और जहां प्रति व्यक्ति आय करीब 90,000 अमेरिकी डॉलर है, जबकि भारत में यह लगभग 3,000 डॉलर है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा की बात ही नहीं है। हम एक-दूसरे के पूरक हैं।"

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम हैं आईसीटी और एआई उत्पाद

मंत्री गोयल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भारत को कई आईसीटी उत्पादों की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, "जैसे एनवीडिया चिप्स, हमें एआई उपकरणों की जरूरत होगी और डेटा सेंटर भी चाहिए होंगे, ताकि हम दुनिया में हो रहे बदलावों के साथ कदम से कदम मिला सकें और हमारी आईटी कंपनियां वैश्विक जरूरतों के अनुरूप खुद को ढाल सकें।" उन्होंने आगे कहा, "यह भारत के लिए बड़ी जीत है कि अमेरिका ने हमें ये सभी आईसीटी उत्पाद उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है, जो इस समय हमारे देश की जरूरत हैं।"

आईसीटी समझौता भारत के लिए बड़ी रणनीतिक जीत

वाणिज्य मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ यह समझौता भारत के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इससे एनवीडिया चिप्स, एआई उपकरण और डेटा सेंटर जैसे अहम आईसीटी उत्पाद मिलेंगे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, आईटी क्षेत्र के विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी हैं। गोयल ने दोहराया कि, "राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमें कई आईसीटी उत्पादों की जरूरत होगी। यदि हमें वैश्विक विकास के साथ बने रहना है और अपनी आईटी कंपनियों को दुनिया की जरूरतों के अनुसार ढालना है, तो ये उत्पाद बेहद जरूरी हैं। यह भारत के लिए बड़ी जीत है कि अमेरिका ने इन्हें उपलब्ध कराने पर सहमति दी है।"

बीटीए बातचीत में भारत-अमेरिका बराबरी के साझेदार

उन्होंने यह भी कहा कि, "भारत अब एक मजबूत देश है और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण की बातचीत में दोनों देश बराबरी के स्तर पर आगे बढ़ेंगे। भारत और अमेरिका साथ मिलकर काम करेंगे और अपने संबंधों को और मजबूत करेंगे। हम दोनों देशों के हित में आगे बढ़ेंगे।"

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