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ईरान संकट के कारण भारत के चावल निर्यातक संकट में

ईरान संकट के कारण भारतीय चावल निर्यातकों का 2,000 करोड़ रूपये डूबने का खतरा

केंद्र सरकार द्वारा निर्यात पर से प्रतिबंध हटाये जाने के बाद भारत ने चावल निर्यात में पिछले साल बड़ी छलांग लगायी थी।

ईरान संकट के कारण भारतीय चावल निर्यातकों का 2000 करोड़ रूपये डूबने का खतरा

फाइल फोटो |

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा निर्यात पर से प्रतिबंध हटाये जाने के बाद भारत ने चावल निर्यात में पिछले साल बड़ी छलांग लगायी थी। भारत ने वर्ष 2025 के दौरान चावल निर्यात में 19.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की थी। लेकिन ईरान में जारी अशांति और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध की धमकी से चावल समेत अन्य जिंसों के निर्यात पर बुरा असर देखने को मिल रहा है। ईरान पर गहरा रहे युद्ध के खतरे के कारण बासमती चावल निर्यात में भारी गिरावट आई है। यही नहीं, भारतीय निर्यातकों का करीब 2,000 करोड़ रुपये डूबने का खतरा पैदा हो गया है। इस संकट के बाद बासमती चावल की कीमतों में 30-40% तक की गिरावट की आशंका है।

ईरान में जारी अशांति के कारण बासमती चावल के निर्यात में आई भारी गिरावट

ईरान में जारी अशांति के कारण भारत के बासमती चावल के निर्यात में भारी गिरावट आई है। ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा बासमती चावल का खरीदार है। भारत से ईरान को पिछले साल लगभग 75 करोड़ डॉलर का चावल निर्यात हुआ था। निर्यात ठप्प होने से पिछले एक हफ्ते में बासमती चावल की कीमतें 5-7 रुपये प्रति किलो तक गिर गई हैं। साथ ही ईरान में व्यापार में रुकावट और भुगतान अटकने से भारतीय निर्यातकों का करीब 2,000 करोड़ रुपये डूबने का खतरा मंडराने लगा है।

30-40% तक गिर सकती हैं बासमती चावल की कीमतें

इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) ने चिंता जताई है। उसने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट ऐसे ही जारी रहा तो बासमती चावल की कीमतें 30-40% तक गिर सकती हैं। फेडरेशन ने बताया कि भुगतान की अनिश्चितता और क्लीयरेंस में देरी के कारण निर्यातकों ने बंदरगाहों पर माल भेजना रोक दिया है। उसने कहा, 'इस संकट ने पंजाब और हरियाणा के किसानों, मिल मालिकों और निर्यातकों के लिए चिंता बढ़ा दी है। ये परिस्थितियां इस वित्तीय वर्ष में भारत के बासमती चावल निर्यात के प्रदर्शन को नुकसान पहुंचा सकती हैं।'

ईरान की गिरती मुद्रा बनी भारत के लिए चिंता का सबब

ईरान में चल रहे हालात की वजह से संचार व्यवस्था ठप हो गई है और निर्यात के पेमेंट अटक गए हैं। ईरान की गिरती मुद्रा भी भारत के लिए चिंता का सबब बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान से जुड़े व्यापार पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इसके चलते ईरान की मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। अब एक अमेरिकी डॉलर खरीदने के लिए लगभग 13 लाख रियाल की जरूरत पड़ रही है। इसका सीधा असर भारत के बासमती चावल निर्यात पर पड़ा है।

भारत ईरान को सालाना करीब 12 लाख टन बासमती चावल करता है निर्यात

भारत ईरान को सालाना करीब 12 लाख टन बासमती चावल निर्यात करता है। आईआरईएफ ने बताया, 'मुद्रा में भारी गिरावट के कारण वहां बहुत ज्‍यादा महंगाई बढ़ गई है। विदेशी मुद्रा की भारी कमी है। इस वजह से ईरानी सरकार को खाद्य आयात पर सब्सिडी वापस लेनी पड़ी है। नतीजतन, ईरानी खरीदारों को भुगतान करने में दिक्कत आ रही है। भारतीय निर्यातकों ने नए शिपमेंट भेजना बंद कर दिया है।' ईरान और भारत के मुंद्रा जैसे बंदरगाहों पर चावल का भारी स्टॉक जमा हो रहा है। भारत में इस साल चावल की बंपर फसल हुई है। ऐसे में यह जमा होता स्‍टॉक निर्यातकों के लिए और भी मुश्किल पैदा कर रहा है। फेडरेशन ने यह भी कहा कि ईरानी खरीदारों को विदेशी मुद्रा हासिल करने में लगातार मुश्किल हो रही है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए भुगतान में देरी हो रही है और उनके लगभग 1,500–2,000 करोड़ का भुगतान अटक सकता है।'

विदेशों में बहुत पसंद किया जा रहा भारत का बासमती चावल

भारत ने वर्ष 2025 के दौरान चावल निर्यात में व 19.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की थी जो कि अब तक का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत का चावल खासकर बासमती विदेशों में बहुत पसंद किया जा रहा है। सुगंधित, स्वादिष्ट और सेहतमंद (उच्च फाइबर, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स) नहीं वाला खाद्य उत्पाद होने के कारण ईरान और रूस समेत कई देशों में इसकी भारी मांग है।

मार्च 2025 में केंद्र सरकार ने हटा लिए थे चावल निर्यात पर लगे प्रतिबंध

केन्द्र सरकार ने मार्च 2025 में चावल पर लगाए गए सभी निर्यात प्रतिबंध हटा लिए थे। इससे भारतीय चावल बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया। देश में रिकॉर्ड उत्पादन के बाद साल 2022 और 2023 में लगाए गए निर्यात प्रतिबंध केन्द्र ने पिछले साल हटा लिये थे। प्रतिबंध हटने का भारत के चावल निर्यात पर सकारात्मक असर रहा है और इससे 2025 के दौरान भारत का चावल निर्यात रिकॉर्ड स्तर के करीब रहा है। सरकार अधिकारियों और उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, भारत के चावल निर्यात में पिछले वर्ष 19.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो कि रिकॉर्ड में दूसरा सबसे उच्चतम स्तर है।

वर्ष 2025 में 19.4 प्रतिशत बढ़ा भारत का चावल निर्यात

सरकारी और उद्योग जगत के अधिकारियों के अनुसार, भारत का चावल निर्यात वर्ष 2025 में 19.4 प्रतिशत बढ़कर 2.155 करोड़ टन (21.55 मिलियन टन) पहुंच गया। यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात स्तर है, जो 2022 के रिकॉर्ड 2.23 करोड़ टन के बेहद करीब है। पिछले वर्ष गैर-बासमती चावल का निर्यात 25 प्रतिशत बढ़कर 1.51 करोड़ टन रहा है, जबकि बासमती निर्यात आठ प्रतिशत बढ़कर रिकार्ड 64 लाख टन रहा है।

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