अयोध्या स्थि भव्य राम मंदिर के लिए आए दान में हेराफेरी के गंभीर आरोपों पर अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
नई दिल्ली। अयोध्या स्थि भव्य राम मंदिर के लिए आए दान में हेराफेरी के गंभीर आरोपों पर अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस कथित घोटाले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर का प्रबंधन देख रहे 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इसके साथ ही, अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को अब तक की कार्रवाई और इसके गठन की पूरी जानकारी के साथ स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
दान में कथित गड़बड़ी, SIT जांच और FIR के बाद कार्रवाई तेज
अयोध्या राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए देश-विदेश से मिले करोड़ों रुपये के दान में कथित रूप से वित्तीय अनियमितताओं और गबन के आरोप सामने आए थे। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। राज्य सरकार की इस शुरुआती जांच के बाद यूपी पुलिस ने मामले में एक प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की है, और वर्तमान में इस पूरे प्रकरण में आठ लोग पुलिस की हिरासत में हैं।
हाईकोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई करने के अनुरोध को खारिज कर दिया था। इस बीच, इस हाई-लेवल जांच की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित मामलों के कारण समानांतर कार्यवाही से बचने के लिए उन पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।
ट्रस्ट को नोटिस टालने से कोर्ट का इनकार
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को इस संवेदनशील मामले की सुनवाई की। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि मामले की स्टेटस रिपोर्ट एक बंद लिफाफे (Sealed Cover) में अदालत के समक्ष पेश की जाएगी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से अनुरोध किया कि मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया को फिलहाल के लिए टाल दिया जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके इस आग्रह को साफ तौर पर ठुकरा दिया।
स्टेटस रिपोर्ट साझा करने से फिलहाल इनकार
याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील ने दलील दी कि मामले से जुड़े सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने मांग की कि राज्य सरकार द्वारा दाखिल की जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट की एक प्रति उन्हें भी मुहैया कराई जाए। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने इस चरण पर उनकी यह मांग स्वीकार नहीं की। इस पर आपत्ति जताते हुए प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों से दो टूक कहा, "हम इसे बाद में देखेंगे। यह एक जारी जांच (Ongoing Investigation) है।"
सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं इन 4 याचिकाओं में क्या है खास?
- सीबीआई जांच और कैग (CAG) ऑडिट: याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने और मंदिर ट्रस्ट के खातों का कैग (CAG) से ऑडिट कराने की मांग की है।
- भक्तों के भरोसे का सवाल: अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की याचिका में कहा गया है कि इन आरोपों से राम मंदिर आंदोलन को समर्थन और दान देने वाले करोड़ों भक्तों में गहरी चिंता है, इसलिए उनके हितों की रक्षा की जाए।
- फॉरेंसिक ऑडिट और वित्तीय अधिकारों पर रोक: आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह और हिंदू धर्म परिषद की याचिकाओं में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ट्रस्ट के सभी डिजिटल, यूपीआई (UPI) और बैंक रिकॉर्ड्स का फॉरेंसिक ऑडिट हो। साथ ही, जांच पूरी होने तक ट्रस्ट को बिना 'ओवरसाइट कमेटी' की मंजूरी के बड़े वित्तीय फैसले लेने से रोका जाए और सारा हिसाब वेबसाइट पर सार्वजनिक हो।
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