कुरैशी ने कहा कि वे विपक्ष के समर्थक थे। अपनी नीति सभी अधिकारियों को बता दी थी, क्योंकि सरकार के पास व्यापक शक्ति है, इसलिए वह कोई भी काम करवा सकती है।
नई दिल्ली । पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एस.वाई. कुरैशी ने सोमवार को कहा कि उनके कार्यकाल में चुनाव आयोग ने विपक्ष के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया, क्योंकि सत्ता से बाहर पार्टियों को निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अधिक संस्थागत समर्थन की आवश्यकता होती है। कुरैशी, जिन्होंने 2010 से 2012 तक 17वें सीईसी के रूप में कार्य किया, उन्होंने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारियों को विपक्षी पार्टियों के लिए सुलभ रहने और उनकी चिंताओं का तुरंत समाधान करने का निर्देश दिया था।
बोले, वे विपक्ष के समर्थक रहे
एएनआई से बात करते हुए कुरैशी ने कहा कि वे विपक्ष के समर्थक थे। अपनी नीति सभी अधिकारियों को बता दी थी, क्योंकि सरकार के पास व्यापक शक्ति है, इसलिए वह कोई भी काम करवा सकती है। विपक्ष सत्ता से बाहर है, और उन्हें सहानुभूति और समर्थन की आवश्यकता है। इसलिए विपक्ष के लिए दरवाजे खुले रहेंगे। अगर वे कल मिलना चाहते हैं, तो उन्हें आज ही मिल लें। अगर वे आज मिलना चाहते हैं, तो अभी मिल लें और उनकी बात सुनकर उनकी समस्या का समाधान करें। विपक्ष के साथ उनके अच्छे संबंध थे। कुरैशी ने कहा कि इस दृष्टिकोण से तत्कालीन प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लाभ हुआ।
जेटली शुरू में बहुत शत्रुतापूर्ण थे
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के दिवंगत नेता अरुण जेटली, जो शुरू में उनके प्रति "बहुत शत्रुतापूर्ण" थे, बाद में उनके कार्यकाल के दौरान विपक्ष की चिंताओं को दूर करते हुए चुनाव आयोग को देखकर "काफी प्रशंसक और समर्थक" बन गए। उन्होंने कहा,"मेरे पूरे छह वर्षों के दौरान, मुख्य विपक्ष भाजपा था। मेरी उदारता का लाभ उन्हें ही मिला। श्री अरुण जेटली, जो सुषमा स्वराज से मेरी निकटता के कारण पहले मेरे प्रति बहुत शत्रुतापूर्ण थे, जब उन्होंने मुझे धैर्यपूर्वक उनकी सभी शिकायतों को सुनते और उनका समाधान करते देखा, तो वे काफी प्रशंसक और समर्थक बन गए।" (एएनआई)