ईरान - इजराइल युद्ध का असर देश में खाद्य तेलों, सूखे मेवे और खजूर-बादाम जैसे उत्पादों पर भी देखने को मिल रहा है।
नई दिल्ली। ईरान - इजराइल युद्ध का असर देश में खाद्य तेलों, सूखे मेवे और खजूर-बादाम जैसे उत्पादों पर भी देखने को मिल रहा है। ईरान-इजराइल तनाव के कारण सामुद्रिक मार्ग (होर्मुज जलडमरूमध्य) बाधित होने से भारत में खाद्य तेल, सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स) और खजूर की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे कीमतों में 5% से 15% तक का उछाल आया है। युद्ध की स्थिति से शिपिंग में देरी और लागत बढ़ने से बासमती चावल, चाय और दवाओं के निर्यात पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
फारस की खाड़ी में तनाव से सप्लाई चेन बेपटरी
फारस की खाड़ी में तनाव से जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। इससे खाद्य तेलों सूखे मेवे और खजूर-बादाम की पहुंचने में देरी हो रही है। इस कारण थोक बाजार में सोमवार को खाने के तेल की कीमतों में 5% तक की तेजी दर्ज की गई। शिकागो में सोयाबीन तेल और मलेशिया-इंडोनेशिया में पाम ऑयल के वायदा बाजार में कीमतों में उछाल आया है। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतों को देखते हुए इनके दाम बढ़ गए हैं। वहीं, सप्लाई में रुकावट से ड्राई फ्रूट्स भी महंगे हो गए हैं। बाजार के सूत्रों का मानना है कि आपूर्ति में बाधा के कारण सूखे मेवे और खजूर के दाम 10-15% तक बढ़ सकते हैं, और खाद्य तेलों में भी तेजी देखी जा रही है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बिगाड़ा खाने के तेल का बजट
ET के मुताबिक, जब भी कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो बायोडीजल बनाने के लिए सोयाबीन और पाम ऑयल का इस्तेमाल बढ़ जाता है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। इससे बायोडीजल की मांग बढ़ गई है। नतीजा यह है कि खाने के काम आने वाले तेल की सप्लाई कम हो गई है। कारोबारियों का कहना है कि युद्ध की वजह से सप्लाई रुकने और कीमतें बढ़ने के डर से लोग ज्यादा तेल खरीद रहे हैं।
रमजान से पहले खजूर और ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में उछाल
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (महाराष्ट्र) के सचिव शंकर ठक्कर का कहना है कि थोक बाजार में आए इस बदलाव का असर आम लोगों के लिए रिटेल कीमतों पर दिखने में अभी कुछ हफ्ते लगेंगे। सिर्फ तेल ही नहीं ड्राई फ्रूट्स का बाजार भी महंगा हो गया है। आमतौर पर रमजान में रोजा खोलने के लिए इस्तेमाल होने वाले खजूर की कीमतें 10-20% तक बढ़ गई हैं। ईरान, अफगानिस्तान और यूएई जैसे ट्रेडिंग सेंटर्स से सप्लाई में दिक्कत आने की वजह से लोकल मार्केट में खजूर की कमी हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद से खजूर, बादाम, पिस्ता और अंजीर के दाम भी बढ़ गए हैं।
भारत-ईरान एक्सपोर्ट में गिरावट और उर्वरकों की संभावित कमी
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह संघर्ष लंबा चलता है, तो इससे घरेलू बाजार में इन वस्तुओं की भारी किल्लत हो सकती है।
यह स्थिति भारत के आयात-निर्यात संतुलन और घरेलू महंगाई पर सीधा असर डाल रही है। युद्ध का भारत से ईरान को होने वाले बासमती चावल, चाय, चीनी, और दवाओं के निर्यात पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। भारत और ईरान के बीच कभी 17 अरब डॉलर का व्यापार होता था, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद घटकर 1.68 अरब डॉलर रह गया है। कृषि और रसायन उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि उर्वरक और केमिकल सप्लाई में बाधा आने से उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में देश में उर्वरकों की भी किल्लत हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं।
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