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खाड़ी संकट से भारत पर चौतरफा मार

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी भारत की चिंता, खाद सब्सिडी और आयात खर्च में भारी उछाल

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल के साथ ही उर्वरकों के मोर्चे पर भारत की चिंता बढ़ती जा रही है।

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी भारत की चिंता खाद सब्सिडी और आयात खर्च में भारी उछाल

West Asia Crisis Pushes India’s Fertilizer Import and Subsidy Burden Higher |

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल के साथ ही उर्वरकों के मोर्चे पर भारत की चिंता बढ़ती जा रही है। पिछले दो महीनों में उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल आया है जिससे भारत का आयात खर्च काफी बढ़ गया है। उर्वरकों की कीमतों में तेजी की वजह से देश का राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

उर्वरकों की कीमतों में 75% तक उछाल

खाड़ी संकट और होर्मुज स्ट्रेट से आवागमन बंद होने से वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले दो महीनों में खाद की कीमत 70-75 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। देश में खाद की जरूरत का 50 प्रतिशत विदेशों, खासकर खाड़ी देशों से होने वाले आयात से पूरी होती है। भारत ही नहीं दुनिया की एक तिहाई खाद होर्मुज के रास्ते से आती है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि खरीफ की फसल को देखते हुए, देश में पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखा है और जरूरतों को पूरा करने के लिए वैश्विक टेंडरों के जरिए नई खेपें मंगवाई जा रही हैं। लेकिन खाद के लगातार आयात से देश का राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

यूरिया और डीएपी की वैश्विक सप्लाई पर असर

वैश्विक स्तर पर 42 प्रतिशत यूरिया और 21 प्रतिशत डीएपी की सप्लाई पश्चिम एशिया से होती है। फरवरी में यूरिया की कीमत 482 डालर प्रति टन थी जो अब बढ़कर 850 डालर प्रति टन को पार कर चुकी है। अगले महीने यह कीमत 900 डालर प्रति टन को पार पहुंचने का अनुमान है। भारत होर्मुज के रास्ते पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए रूस, अफ्रीका और अन्य वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुरक्षित कर रहा है। देश में सरकार किसानों को खाद पर सब्सिडी भी मिलती है। इसलिए हर साल सरकार को खाद सब्सिडी के मद में अच्छी खासी रकम का आवंटन करना पड़ता है।

खाद सब्सिडी बिल ₹3 लाख करोड़ पार होने की आशंका

चालू वित्त वर्ष में उर्वरक सब्सिडी के ₹3 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर जाने की आशंका है। केन्द्र ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में खाद सब्सिडी के लिए 1.7 लाख करोड़ का आवंटन किया गया था। पश्चिम एशिया संकट के कारण अब खाद सब्सिडी बढ़कर तीन लाख करोड़ को पार कर सकती है। अगर अक्टूबर तक पश्चिम एशिया संकट जारी रहा तो खाद सब्सिडी बिल 3.5 लाख करोड़ के पार जा सकती है जिससे राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है जो 16.93 लाख करोड़ रुपये होता है।

आयात खर्च और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ा दबाव

विगत कुछ महीनों में भारत का उर्वरक आयात खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इस वजह से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है और राजकोषीय घाटे पर गहरा दबाव बढ़ गया है। देश में उर्वरकों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली प्राकृतिक गैस (LNG) और तैयार उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के कारण सरकार का सब्सिडी बिल ₹1.71 लाख करोड़ के बजट अनुमान को पार कर ₹3 लाख करोड़ के करीब जा सकता है। पिछले कुछ महीनों में आयातित यूरिया के दाम $500 प्रति टन से बढ़कर $935 - $959 प्रति टन तक पहुंच गए हैं। इससे सरकार के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आयी है।

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