नई दिल्ली। स्मार्टफोन का बढ़ता इस्तेमाल अब केवल एक आदत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी बन चुका है। देश में मोबाइल की लत एक 'साइलेंट किलर' का रूप ले रही है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में औसतन हर व्यक्ति रोजाना 5 से 6 घंटे स्मार्टफोन पर बिता रहा है, जिससे युवाओं और बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत दांव पर लगी है।
युवाओं में बढ़ा डिप्रेशन और 'टेक्स्ट नेक' का खतरा
अत्यधिक मोबाइल उपयोग के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार स्क्रीन देखने से युवाओं में एंग्जायटी, डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। इसके साथ ही, ज्यादा झुककर फोन चलाने से रीढ़ की हड्डी और गर्दन में बीमारी 'टेक्स्ट नेक' के मामले पिछले एक साल में 40% तक बढ़े हैं। मोबाइल से निकलने वाली ब्लू लाईट के कारण लोग अनिद्रा का शिकार हो रहे हैं।
बच्चों के मानसिक विकास पर असर
मोबाइल के ज्यादा प्रयोग से बच्चों में फोकस की भारी कमी देखी जा रही है। वे डिजिटल एडिक्शन की चपेट में आ रहे हैं, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर बहुत असर पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह: अपनाएं डिजिटल डिटॉक्स
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है, कि लोग अपनी सेहत के लिए 'डिजिटल डिटॉक्स' अपनाएं। रात को सोने से ठीक एक घंटा पहले मोबाइल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दें। दिन के समय में भी अनावश्यक मोबाइल का इस्तेमाल ना करें।
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