नई दिल्ली,(भारत)। हिंदू धर्म और तंत्र साधना में गुप्त नवरात्रि का एक विशेष और अत्यंत रहस्यमयी महत्व है। जहाँ चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की सार्वजनिक रूप से पूजा की जाती है, वहीं आषाढ़ और माघ मास में आने वाली गुप्त नवरात्रि पूरी तरह से गोपनीय होती है।
साधना, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक ऊर्जा को जगाने के लिए समर्पित
वर्ष 2026 में आषाढ़ गुप्त दुर्गापूजा 15 जुलाई (बुधवार) से प्रारंभ होकर 24 जुलाई (शुक्रवार) तक रहेगी। इन नौ दिनों में साधक अपनी साधना को गुप्त रखकर 10 महाविद्याओं की विशेष आराधना करते हैं। साधक अपने तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक ऊर्जा को जगाने के लिए मां दुर्गा के दस महाविद्या स्वरूपों की पूजा करते हैं।
गुप्त नवरात्रि का महत्व और गोपनीयता
'गुप्त' शब्द का सीधा अर्थ है—छिपा हुआ या गोपनीय। मान्यता है, कि इस नवरात्रि के दौरान किए जाने वाले मंत्र जाप, अनुष्ठान और तांत्रिक साधनाओं को जितना अधिक गोपनीय रखा जाता है, उनका फल उतना ही शीघ्र और प्रभावशाली मिलता है।
10 महाविद्याएं और उनका स्वरूप
गुप्त नवरात्रि के दौरान मां आदिशक्ति के जिन 10 शक्तिशाली और तांत्रिक स्वरूपों की पूजा की जाती है, वे इस प्रकार हैं:
मां काली
दशमहाविद्याओं में प्रथम, जो समय (काल), मृत्यु और अहंकार का विनाश करती हैं। इनकी साधना से भय दूर होता है, शत्रुओं पर विजय मिलती है और आत्मबल बढ़ता है।

मां तारा
संकटों से उबारने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी। तंत्र मार्ग में इनका विशेष स्थान है; इनकी कृपा से जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं।

मां त्रिपुर सुंदरी (षोडशी)
ब्रह्मांड के सौंदर्य, प्रेम और आनंद का प्रतीक। इनकी आराधना से वैवाहिक सुख, सौभाग्य, मानसिक शांति और आकर्षण शक्ति की प्राप्ति होती है।

मां भुवनेश्वरी
संपूर्ण सृष्टि का संचालन करने वाली जगतमाता। यह ऐश्वर्य और करुणा की देवी हैं, जिनकी साधना से धन-धान्य, मान-सम्मान और पारिवारिक सुख मिलता है।

मां भैरवी
तेज और उग्रता का प्रतीक, जो अज्ञान, आलस्य और डर को नष्ट करती हैं। इनकी पूजा से साधक में अदम्य साहस और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

मां छिन्नमस्ता
आत्म-त्याग और सर्वोच्च चेतना का प्रतीक। इनका रहस्यमय स्वरूप यह सिखाता है कि अहंकार का सिर काटकर ही परम ज्ञान और मानसिक बंधनों से मुक्ति संभव है।

मां धूमावती
वैराग्य और तपस्या की देवी, जो सांसारिक मोह-माया से मुक्त कराती हैं। वृद्ध स्वरूप में पूजी जाने वाली मां धूमावती कठिन समय में धैर्य और मानसिक स्थिरता देती हैं।

मां बगलामुखी
'स्तंभन शक्ति' की अधिष्ठात्री देवी। यह शत्रुओं की बुद्धि, वाणी और विरोध को शांत कर देती हैं। कोर्ट-कचहरी के विवादों और मुकदमों में विजय के लिए इनकी साधना अचूक है।

मां मातंगी
इन्हें 'तंत्र की सरस्वती' कहा जाता है। कला, संगीत, बुद्धि, ज्ञान और मधुर वाणी की प्राप्ति के लिए विद्यार्थी, कलाकार और लेखक विशेष रूप से इनकी आराधना करते हैं।

मां कमला (कमलात्मिका)
दशमहाविद्याओं का अंतिम स्वरूप, जिन्हें महालक्ष्मी का तांत्रिक रूप माना जाता है। इनकी कृपा से जीवन में दरिद्रता का नाश होता है और धन, वैभव व समृद्धि आती है।

जीवन की बाधाओं को दूर करने का अवसर
गुप्त नवरात्रि सामान्य पूजा-पाठ से आगे बढ़कर अपनी आंतरिक शक्तियों को जगाने और दसों महाविद्याओं के आशीर्वाद से जीवन की बाधाओं को दूर करने का एक परम पावन अवसर है।
(Disclaimer:- Prime News इस लेख की पुष्टी नही करता, यह लेख धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है।)
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