डिंडौरी प्रशासन ने छात्रावासों और आश्रमों में रहने वाले जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए ‘Soles for Souls’ पहल शुरू की है। इसके तहत बच्चों को जूते, मौजे, पानी की बोतल समेत जरूरी सामान दिया गया।
डिंडौरी: डिंडौरी जिले में प्रशासन ने जरूरतमंद और गरीब बच्चों की मदद के लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की है। जिले के छात्रावासों और आश्रमों में रहकर पढ़ाई करने वाले बच्चों को अब जूते-मौजे, पानी की बोतल सहित उनकी जरूरत की अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों की जरूरतें पूरी करना नहीं, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का हौसला पैदा करना भी है।
'Soles for Souls' कार्यक्रम का किया गया आयोजन
'Soles for Souls' नाम से शुरू किया गया यह नवाचार निश्चित रूप से उन बच्चों के लिए मिल का पत्थर साबित हो सकता है, जो सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा हासिल कर रहे हैं। तस्वीरें डिंडौरी जिले के समनापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम गौरा कंहारी स्थित राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह वृहद बालक आश्रम की हैं, जहां जिला प्रशासन की पहल और प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से 'Soles for Souls' कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कलेक्टर ने बच्चों को पहनाए जूते
कार्यक्रम के दौरान आश्रम में अध्ययनरत जरूरतमंद बच्चों को जूते, मौजे, पानी की बोतल सहित अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण किया गया। इस दौरान सबसे भावुक तस्वीर उस समय देखने को मिली, जब कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने स्वयं बच्चों को जूते पहनाए। कलेक्टर ने बच्चों से संवाद करते हुए उनकी पढ़ाई और सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली। प्रशासनिक अधिकारी जब बच्चों के बीच पहुंचे तो बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आई।
जरूरतमंद बच्चों को सुविधाएं दिलाने के लिए प्रशासन की नई पहल
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि जिले के छात्रावासों और आश्रमों में रहने वाले ऐसे बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह नवाचार शुरू किया गया है। जिला प्रशासन की पहल पर जिले के अधिकारियों के सहयोग से बच्चों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसका उद्देश्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को पढ़ाई के दौरान जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े और वे पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा जारी रख सकें।
छोटी जरूरतों के लिए बच्चों को न करना पड़े संघर्ष
डिंडौरी जैसे आदिवासी बहुल जिले में बड़ी संख्या में बच्चे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से आकर छात्रावासों और आश्रमों में रहकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। कई बार आर्थिक परिस्थितियों के कारण बच्चों को जूते, मौजे, पानी की बोतल जैसी छोटी लेकिन जरूरी चीजों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन की यह पहल बच्चों के लिए राहत के साथ-साथ संवेदनशील प्रशासन की तस्वीर भी पेश करती है।
ये भी पढ़ें- मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव, आरोपी गिरफ्तार