बैतूल के पाढर आदिवासी सीनियर छात्रावास के छात्रों ने अधीक्षक पर मारपीट और अवैध वसूली के आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया।
Betul Hostel Students March 18 km to Collectorate, Allege Harassment by Superintendent |
बैतूल,(मध्य प्रदेश)। पाढर स्थित आदिवासी सीनियर छात्रावास के दर्जनों छात्र बुधवार को अधीक्षक पर प्रताड़ना, मारपीट और अवैध वसूली के आरोप लगाते हुए करीब 18 किलोमीटर पैदल चलकर बैतूल कलेक्ट्रेट पहुंच गए। कलेक्टर से मिलने की जिद पर अड़े छात्रों ने कलेक्ट्रेट परिसर के सामने ही जमीन पर धरना दे दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने करीब एक घंटे तक उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे। आखिरकार कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे स्वयं कलेक्ट्रेट पहुंचे और छात्रों को अपने चैंबर में बुलाकर उनकी शिकायतें सुनीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने जांच समिति गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित अधीक्षक को पाढर छात्रावास से हटा दिया गया है।
अधीक्षक लंबे समय से छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार
जानकारी के अनुसार पाढर आदिवासी सीनियर छात्रावास के छात्रों ने आरोप लगाया कि अधीक्षक लंबे समय से उनके साथ अभद्र व्यवहार करता है। छात्र बताते हैं कि वह शराब के नशे में मारपीट करता है। देर से छात्रावास लौटने पर रुपए और मुर्गा मांगता है तथा बीमार होने पर इलाज के नाम पर भी पैसे लिए जाते हैं। छात्रों का कहना था कि अब वे इस माहौल में छात्रावास में नहीं रह सकते। उन्होंने साफ कहा कि, या तो अधीक्षक रहेगा या हम। यदि उसे नहीं हटाया गया तो हम अपने-अपने घर चले जाएंगे।
छात्रावास छोड़कर पैदल ही बैतूल के लिए निकल पड़े छात्र
बताया जा रहा है कि पूरे विवाद की शुरुआत दो दिन पहले हुई। सहवाग नाम का एक छात्र खेलने के लिए नई बॉल लेकर आया था, जो बाद में गायब हो गई। बुधवार को छात्रों ने वही बॉल अधीक्षक के बच्चों के पास देखी। जब उन्होंने अपनी बॉल वापस मांगी तो उन्हें पुरानी और टूटी हुई बॉल दे दी गई। छात्रों ने इसका विरोध किया तो आरोप है कि अधीक्षक ने सहवाग की पिटाई कर दी। इस घटना से नाराज छात्र एकजुट हो गए और छात्रावास छोड़कर पैदल ही बैतूल के लिए निकल पड़े।
छात्रों की शिकायत पर होगी कार्रवाई
करीब 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने कलेक्टर से मिलने की मांग की। जब तत्काल मुलाकात नहीं हो सकी तो सभी छात्र कलेक्ट्रेट परिसर के सामने जमीन पर बैठ गए और धरने पर अड़ गए। सूचना मिलने पर एसडीएम अभिजीत सिंह और तहसीलदार मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने भी छात्रों के बीच जमीन पर बैठकर करीब एक घंटे तक उन्हें समझाने का प्रयास किया और भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई होगी।
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