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दिल का दौरा पड़ने से वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक का निधन

डूंगरपुर के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. अनिल बनवीर का विदेश यात्रा के दौरान निधन, चिकित्सा जगत में शोक

डूंगरपुर के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. अनिल बनवीर का अमेरिका से मेक्सिको के बीच क्रूज यात्रा के दौरान हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके निधन से चिकित्सा जगत में शोक है।

डूंगरपुर के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ अनिल बनवीर का विदेश यात्रा के दौरान निधन चिकित्सा जगत में शोक

Senior Orthopedic Surgeon Dr. Anil Banveer Passes Away During Cruise Trip |

डूंगरपुर (राजस्थान)। वागड़ अंचल के जाने-माने वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ और डूंगरपुर जिला अस्पताल के पूर्व प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल बनवीर (75 वर्ष) का मंगलवार को अमेरिका से मेक्सिको के बीच क्रूज पर यात्रा के दौरान अचानक हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे अपनी डॉक्टर पत्नी के साथ विदेश घूमने गए थे। समुद्र के बीच क्रूज पर उनके अंतिम सांस लेने की खबर जैसे ही डूंगरपुर पहुंची, पूरे जिले सहित प्रदेश के चिकित्सा जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

विदेश यात्रा के दौरान बिगड़ी तबीयत, डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. अनिल बनवीर अपनी पत्नी डॉ. निशा बनवीर के साथ गत 9 जुलाई को विदेश यात्रा पर गए थे। मंगलवार को दोनों क्रूज के जरिए अमेरिका से मेक्सिको की ओर बढ़ रहे थे कि सफर के दौरान समुद्र के बीच में ही डॉ. बनवीर की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें आनन-फानन में क्रूज पर मौजूद डॉक्टरों की टीम के पास ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने गहन जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। यात्रा के दौरान पत्नी के साथ मुस्कुराते हुए खींची गई तस्वीरें अब उनकी आखिरी यादें बनकर रह गई हैं।

20 हजार से अधिक सफल ऑपरेशन, दिव्यांगों के मसीहा थे डॉ. बनवीर

डॉ. अनिल बनवीर को वागड़ क्षेत्र में उनके बेहतरीन चिकित्सा कार्यों, सेवाभावी स्वभाव और सामाजिक सरोकारों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने डूंगरपुर, बांसवाड़ा और सागवाड़ा सहित कई अन्य क्षेत्रों में पोलियो करेक्शन के 20 हजार से ज्यादा सफल ऑपरेशन किए थे। जन्मजात और अन्य कारणों से चलने-फिरने की समस्या से जूझ रहे हजारों दिव्यांग बच्चों और वयस्कों को अपने पैरों पर खड़ा कर उन्होंने एक नया जीवन दिया था। 

सेवानिवृत्ति के बाद भी मरीजों की सेवा में रहे समर्पित

सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने लंबे समय तक डूंगरपुर जिला अस्पताल और सागवाड़ा अस्पताल में अपनी सेवाएं दीं और पीएमओ के पद को सुशोभित किया। वर्ष 2013 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी मरीजों के प्रति उनका सेवा भाव कम नहीं हुआ और वे पिछले 13 वर्षों से डूंगरपुर के एक निजी अस्पताल में नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे थे।

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